Tuesday, 15 August 2017

बिना शादी के सुहागरात मनानी पड़ी-1




मेरा नाम पूजा अरोड़ा है, मैं बी टेक 3र्ड इयर की स्टूडेंट हूँ. मेरी उमर 21 साल है. भगवान की कृपा से रंग गोरा और दिखने में सुन्दर हूँ. सुन्दर हूँ.. शायद इससे अच्छा आप यह बोल सकते हो कि मैं एक बार्बी डॉल सी क्यूट हूँ.
मैं हरियाणा के छोटे से जिले यमुनानगर से हूँ और बी टेक करने दिल्ली आई हूँ, मेरा कॉलेज गुरुग्राम में है.
मेरे परिवार में मेरे पिता जी, माँ और एक छोटा भाई है जो मुझसे बहुत प्यार करते हैं और मैं भी अपने परिवार से बहुत प्यार करती हूँ, शायद यही कारण था कि मैं आज तक किसी ग़लत चक्कर में नहीं पड़ी और ना ही कभी बॉयफ्रेंड बनाया.
मेरा फिगर 36-24-36 का है, मैं अपने फिगर को लोगों को आकर्षित करने के लिए नहीं पर अपनी खुशी के लिए मेंटेन रखती हूँ. मेरे कॉलेज के सब लड़के मेरे दीवाने हैं. बहुत लड़कों ने मुझे प्रपोज़ किया है पर मैंने कभी किसी को कभी हाँ नहीं कहा और ना ही कभी किसी लड़के से कभी दोस्ती की.
लेकिन किस्मत ने जब जिससे जहाँ मिलना होता है, मिला देती है और शायद किस्मत को ऋषि को मुझसे मिलना था.
ऋषि मेरा एक दोस्त है जो मुझे गुरुग्राम में ही मिला. ऋषि दिखने में भी बहुत अच्छा है, मन में एक बार तो आया था कि उसे अपना बॉयफ्रेंड बना लूँ पर अपने माँ बाप की इज़्ज़त पर कोई आँच नहीं आने देना चाहती इसलिए सिर्फ़ दोस्त ही रहने दिया उसे भी.
ऋषि रहने वाला मेरठ का है और मुझे गुरुग्राम के एक माल में मिला था. वो यहाँ एक कंपनी में डेटा अनालिस्ट है.
एक बार मॉल में कुछ लड़के मुझे छेड़ रहे थे तब ऋषि ने मुझे उनसे बचाया था और हॉस्टल तक छोड़ा था. तब से मेरी और ऋषि की दोस्ती हो गई. ऋषि ने मुझे बाद में प्रपोज़ भी किया तो मैंने उससे बता दिया- ऋषि, मैं सिर्फ़ अरेंज मैरिज करना चाहती हूँ वो भी उससे जो मेरे माँ बाप मेरे लिए ढूंढेंगे. तुम एक अच्छे लड़के हो इसलिए मैं तुम से दोस्ती नहीं तोड़ना चाहती.
ऋषि एक शरीफ लड़का था तो उसने मुझे समझा और उसने इसलिए भी मुझे समझा क्योंकि वो मेरे बारे में सब जानता था. ऋषि को पता था कि पूजा एक शरीफ लड़की है और कभी बॉयफ्रेंड ना बनाया है और ना बनाएगी.
एक बार ऋषि ने मुझे पूछा कि क्या मैं वर्जिन हूँ. तो मैंने उससे बहुत सुनाया कि क्या मतलब है उसका कि मैं वर्जिन हूँ.
मैंने उससे बोला- एक बात, जब आज तक मैं किसी लड़के के साथ नहीं हुई तो यह सवाल कैसा और दूसरा उसे शर्म आनी चाहिए यह सवाल पूछते हुए मुझसे!
मैंने उससे दोस्ती तोड़ दी, उसने माफी माँगी पर मैंने उससे माफ़ नहीं किया.
उस पर तरस तो आया पर हिम्मत नहीं हुई उससे नज़रें मिलाने की… उसके इस सवाल के बाद!
एक दिन मुझे कॉलेज की फीस भरनी थी तो मैंने पिता जी को फोन कर दिया. हालांकि मुझे पिता जी से पैसे लेना अच्छा नहीं लगता था पर मैंने सोच रखा था की मेरी पढ़ाई कंप्लीट होते ही और नौकरी लगते ही पिता जी को एक एक रूपया लौटा दूँगी.
मेरे फोन करते ही पिता जी ने मेरे अकाउंट में 1 लाख 30 हज़ार जमा करवा दिए. शनिवार का दिन था, तब बैंक हाफ डे के लिए ही खुलता था, मैंने अपनी रूममेट को बोला- मेरे साथ बैंक चल… पर उसकी तबीयत कराब थी तो मैं अकेली चली गई.
एक बार तो सोचा ऋषि को फोन करके बुला लूँ, वैसे भी अब नाराज़ हुए काफ़ी दिन हो गये थे, पर फिर सोचा छोड़ो. बाद में देखते हैं. और पहले फीस का काम निपटा लूँ.
मैं सुबह 10 बजे बैंक पौंछ गई, वहाँ पर्ची भर के पैसे ले लिए. मैंने पैसे बैंग में डाले और कैब बुलवा कर हॉस्टल आ गई. किस्मत से ट्रॅफिक ना मिलने के कारण मैं 12 बजे तक हॉस्टल पहुंच गई थी. हॉस्टल में एंट्री लेते हुए समय मैंने देखा कि फीस विंडो पर लाइन नहीं लगी हुई है और विंडो भी खुला था तो सोचा क्यूँ ना अपनी फीस ही भर दूं और यह काम पूरे से निपटा दूं और वैसे भी सोमवार को काफ़ी लंबी लाइन लगने वाली थी.
मैं फीस काउंटर पर गई और फॉर्म लेकर अपना नाम, बेच, रोल नंबर और सब भर दिया. जैसे मैं विंडो पर पहुंची और पैसे निकालने के लिए बैग में हाथ डाला तो देखा बैग में से पैसे गायब थे. मैंने घबरा कर बैग में से सारा सामान निकल दिया और देखा बाद में एक छेद हुआ पड़ा था और पैसे बैग से गायब थे. मैं वहीं चक्कर खाकर गिर गई.
तभी हॉस्टल की वॉर्डन ने और ना जाने किसने मुझे मेरे हॉस्टल रूम में पहुंचाया.
जब मुझे होश आया तो एक पल कि मुझे लगा कि सपना था पर पास में बैग देख कर समझ आया कि सपना नहीं यह सच था कि मैंने अपनी फीस के 1 लाख 30 हज़ार गुमा दिए थे. मैं एकदम से घबरा गई और समझ नहीं आया कि क्या करूँ!
घबराहट में मुझे कुछ नहीं सूझा और मैंने तुरंत अपने दोस्त ऋषि को फोन घुमा दिया. ऋषि ने जैसे ही मेरा फोन उठाया, मैंने उससे रोते रोते सब बताया कि क्या हुआ.
ऋषि ने मुझे फोन पर चुप करवाया और बाहर बुलाया क्योंकि वो गर्ल्स हॉस्टल की अंदर तक नहीं आ सकता था.
मैं बाहर ऋषि का वेट कर रही थी और 5 ही मिनट में ऋषि अपने किसी दोस्त की मोटरसाइकल लेकर आ गया. ऋषि के आते ही मेरा रोना फिर छूट गया तो उसने मुझे बोला- चुप हो जाओ और यहाँ से चलो पहले!
और यह कह कर वो मुझे दूर एक पार्क में ले गया और पूरी बात पूछी. पूरी बात जानने के बाद वो मुझे मोटरसाइकल से बैंक के रास्ते और बैंक से हॉस्टल के रास्ते ले गया पर कुछ नहीं मिला.
मुझे रोता देख ऋषि बोला- देखो पूजा, पैसे तो मेरे पास भी नहीं है, नहीं तो मैं तुम्हें दे देता… पर मैं वादा करता हूँ कि 2 दिन का समय दो तो मैं कुछ कर पाऊंगा.
मैंने ऋषि की बात मान ली और हम दोनों सोचने लगे.
तीसरे दिन मैंने ऋषि को फोन किया और बोला- ऋषि, फीस भरने की आख़िरी डेट आने वाली है, जल्दी कुछ नहीं किया तो बहुत बड़ी मुसीबत में फंस जाऊँगी.
तभी ऋषि ने बोला- पूजा तुम परेशान मत हो, पैसों का इंतज़ाम 80% हो गया है पर पहले तुम मिलो मुझे.
मैं ऋषि से मिलने पहुँची और फिर वो मुझसे मोटरसाइकल पर बिठा कर एक पार्क में ले गया और बेंच पर हम बैठ गये.
तभी ऋषि ने मुझे एक बात बोल कर हैरान और परेशन दोनों कर दिया.
ऋषि ने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और बोला- देख पूजा, मैं तुझे अपना बहुत प्यार दोस्त मानता हूँ, समझ नहीं आ रहा कि कैसे बोलूं तुझे… पर मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है.
ऋषि ने कहा- पूजा, मैंने 2 दिन पहले अपने एक दोस्त से बात की पैसों के लिए और मैंने उसे तुम्हारी पूरी कहानी भी बता दी थी कि क्यों एकदम से इतने पैसों की ज़रूरत आ पड़ी है पर उसके पास भी पैसे ना होने के कारण उसने मना कर दिया था.
ऋषि मुझसे बोला- पूजा, आज मेरे उसी दोस्त का फ़ोन आया था और वो बोला की 1 लाख 30 हज़ार की जगह 2 लाख मिल जाएँगे अगर तुम एक आदमी के साथ पूरी रात गुजार लो तो!
यह सुनते ही मुझे सब समझ तो आ गया था पर यकीन नहीं हुआ था कि यह ऋषि ने क्या बोल दिया.
मैंने ऋषि को कहा- वॉट डू यू मीन कि पूरी रात गुज़ारनी होगी?
ऋषि बोला- तुम्हें एक आदमी के साथ सेक्स करना होगा और पूरी रात उसी पास रहना पड़ेगा.
मुझे ऋषि पर बहुत गुस्सा आया और मैंने उससे तमाचा मार दिया और रोते हुए अपने हॉस्टल आ गई.
मेरे हॉस्टल आने के बाद मैंने ऋषि को सॉरी का मेसेज किया और सोने की कोशिश करने लगी पर टेंशन में और ऋषि की बात सुन कर नींद नहीं आ रही थी. मैं बहुत डरी हुई थी, समझ नहीं आ रहा था कि कैसे क्या करूँ. एक बार तो सोचा कि घर पर ही बता दूं पर फिर अपने घर की आर्थिक हालत के बारे में सोच कर मैंने चुप रह कर खुद से सब संभालने की सोची.
पर संभालना कैसे था… यह समझ नहीं आ रहा था.
अब 5 दिन बीत चुके थे और आज गुरुवार था और सोमवार को फीस भरने की आख़िरी तारीख थी. गुरुवार की रात तक सब कुछ सोचने के बाद जब कुछ रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था तो ऋषि की बात मेरे दिमाग़ में घूमने लगी. एक बार दिमाग़ ने कहा कि पूजा एक रात किसी और के साथ… तेरी सब दिक्कत दूर कर देगी और सेक्स कभी ना कभी तो करना ही पड़ेगा और आजकल सब शादी से पहले कर चुके होते हैं पर किसी अंजान आदमी के साथ कैसे?
पूरी रात सोचते सोचते निकल गई और फिर मैंने शुक्रवार की सुबह ऋषि को फोन किया, कहा- ऋषि मैं तैयार हूँ, पर यह बात प्लीज़ तुम्हारे और मेरे बीच में ही रखना!
ऋषि बोला- ठीक है, मैं पता करके बताता हूँ कि कब जाना होगा.
आधे घन्टे बाद ऋषि ने मुझसे मेरा अकाउंट नंबर माँगा और कहा- इसमें अभी 50 हज़ार आ जाएँगे और बाकी के बाद में… और तुम्हें आज की रात ही जाना पड़ेगा तो तुम वॉर्डन को बोल दो कि तुम घर जाओगी आज शाम को!
मैंने ऋषि की बात मान ली और वैसा ही किया.
ऋषि मुझे 6 बजे हॉस्टल से ले गया और फिर एक जगह जाकर हम खड़े हो गये. मुझे बहुत ड़र लग रहा था.
तभी वहाँ एक सफेद गाड़ी आकर रुकी और उसमें से एक लड़का निकला. लड़के ने ऋषि से हाथ मिलाया और मुझे कहा- डरो मत, मैं ऋषि का दोस्त हूँ, मैं आपको वहाँ छोड़ कर आऊंगा और फिर कल दोपहर लेने भी आऊंगा और फिर ऋषि आपको यहीं से ले जाकर हॉस्टल छोड़ देगा.
और फिर मुझे साथ चलने को कहा.
मैं चुपचाप गाड़ी में बैठ गई और ऋषि का दोस्त, जिसका नाम अंशुल था, आगे की सीट पर ड्राइवर के साथ बैठ गया.
रास्ते में अंशुल ने मुझे कहा- तुम बहुत प्यारी हो और तुम्हें मैं सचिन सर के पास छोड़ के आने वाला हूँ.
रास्ते में उसने मुझे अपने सचिन सर के बारे में बताया.
अंशुल ने बताया- सचिन सर करीब 34 साल के हैं और बहुत बड़े बिजनेसमैन हैं, भारत में उनके कई बिजनेस हैं..
और सब कुछ बताया.
अंशुल ने यह भी बताया- सचिन सर की कभी शादी नहीं हुई है, एक बार शादी तय हुई थी पर जिस लड़की से उनकी शादी तय हुई थी, वो लड़की मंडप से अपने बॉयफ्रेंड के साथ भाग गई थी और उसके बाद सचिन सर ने कभी शादी नहीं की और अपने काम में लग गये.
करीब 45 मिनट में हम सचिन सर के घर पहुंच गये. उसे घर कहना शायद ठीक नहीं होगा, वो एक महल से काम नहीं था, घर के गेट पर ही 2 गार्ड खड़े थे.
गाड़ी अंदर गई, ड्राइवर ने घर के दरवाजे पर कार रोक दी. मैं और अंशुल गाड़ी से उतर के अंदर गये तो देखा एक बहुत बड़ा हॉल था जिसमें सोफे पर कोई आदमी बैठा था. देखने में तो 34 की उमर का सचिन नहीं लगा तो मुझे लगा कोई होगा… यह सचिन का छोटा भाई हो सकता है. उसका शरीर जिम जाने वाले लड़कों की तरह तना हुआ था और हाइट उसकी 5 फुट 11 इंच होगी.
हम जैसे ही थोड़ा करीब पहुंचे तो अंशुल ने बताया- ये ही सचिन सर हैं!
और फिर मुझे इंट्रोड्यूस करवाया.
मैंने घबराते हुए अपने काँपते हाथ से उनसे हाथ मिलाया.
उन्होंने हमें बैठने को कहा.
तभी अंशुल ने कहा- चलो, मैं चलता हूँ कल दस बजे तक आ जाऊँगा आपको लेने!
यह बोल कर अंशुल चला गया और सचिन अंदर कहीं चले गये.
थोड़ी देर बाड 2 चाईनीज या पहाड़ी सी दिखने वाली लड़कियाँ आई और मुझे कहा- चलो हमारे साथ!
और एक कमरे में ले गई, वो कमरा वैसा था जैसा मॉडेल्स या हीरो हेरोइन के तैयार होने के लिए होता है.
उन्होंने ने मुझे कहा- हम तुम्हें यहाँ दुल्हन की तरह तैयार करेंगे क्योंकि सचिन सर तुम्हें अपनी दुल्हन की तरह देखना चाहते हैं.
मैं समझ गई कि आज मेरी बिना शादी के सुहागरात मनेगी. मैं बहुत घबराई हुई थी.
उन्होंने मुझे एक कुर्सी पर बैठा दिया और फिर मेरी टीशर्ट और जीन्स उतार कर बैठने को कहा.
मैं बोली- मुझे बहुत शर्म आएगी आप दोनों के सामने!
तब उन्होंने समझाया कि वो भी लड़कियाँ ही हैं और शरमाने की कोई बात नहीं है.
मैंने उनकी बात मान ली और अपने कपड़े उतार दिए.
फिर उन्होंने मेरे वक्ष का साइज़ चेक किया और मेरे साइज़ से 1 नंबर छोटी ब्रा और पेंटी के 4-5 सेट मंगवा लिए. फिर वो दोनों मेरे हाथों पैरों की वैक्सिंग करने लगी.
उसके बाद उन्होंने मेरे हाथों पैरों पर मेहंदी लगाई.
फिर उन्होंने मेरा फेशियल किया और नहलाया और पूरा अच्छे से तैयार कर दिया. उन्होंने मेरी बुर पर से भी बाल पूरी तरह साफ कर दिए थे.
फिर उन्होंने मुझे एक डार्क ब्लू कलर की ब्रा और पेंटी पहना दी जो थोड़ी टाइट थी और मेरे शरीर को और उभार रही थी. मुझे जो पेंटी पहनाई थी वो भी डार्क ब्लू की थी जिसके आगे थोड़ा सा जाली वाला डिज़ाइन था.
मुझे एक लहंगा पहनाया गया और हाथ में कुछ चूड़ियाँ और दुल्हन वाला चूड़ा पहनाया और पैरों में पायल पहनाई. यहाँ तक कि उन्होंने मुझे गले में एक मंगल सूत्र पहनने को भी दिया.
मुझे पूरी तरह दुल्हन की तरह सज़ा दिया गया.
मैंने जब खड़े होकर खुद को शीशे में देखा तो खुद को एक बार यकीन नहीं हुआ कि मैं इतनी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी.
फिर मुझे वो लोग एक कमरे में ले गये. कमरे में जाते ही मैंने देखा कि कमरे में बेड को फूलों से सजाया हुया था. मुझे उस बेड पर बैठा कर वो दोनों वहाँ से चली गई.
मैं बहुत डर रही थी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है और क्या होने वाला था. हालांकि मुझे पता था कि आज मेरे साथ क्या होने वाला है.
करीब 15 मिनट में सचिन कमरे में आए, दरवाज़ा बंद कर दिया और ए.सी. का टेंपरेचर 16 पर कर दिया. वो मेरे करीब आकर बैठ गये और फिर मेरा हाथ पकड़ कर कहा- आज रात तुम मेरी पत्नी हो, मुझे अपने पति की तरह प्यार करना है तुम्हें आज!
मैंने नज़रें नीचे झुका ली…
उन्होंने मुझे गले से लगाया और बेड पर लिटा दिया और वो भी मेरे पास ही लेट गये और मेरे हाथ को पकड़ लिया.
मैं बहुत घबरा रही थी. उन्होंने फिर मेरे माथे पर किस किया, फिर मेरी आँखों पर और फिर मेरे गाल पर!
जैसे ही वो मेरे लिप्स पर किस करने लगे, मैंने मुँह फेर लिया.
कहानी जारी रहेगी.
मेरी कहानी कैसी लग रही है

दो कमसिन बहनों की कुंवारी बुर की चुदाई






मेरे घर पर मेरी माँ और दो बहनें रहती हैं। उन दोनों की बुर की चुदाई कैसे की मैंने…
यह उन दिनों की बात है जब मैं 12वीं में पढ़ता था, जुलाई का महीना था, मेरी क्लास शुरू होने को थी।
उन्ही दिनों मेरे घर में पेइंग गेस्ट रहने को आये, वो लोग ऊपर के माले पर रहने लगे। आंटी और उनकी दो बेटियाँ… आंटी नर्स थी और थोड़ी बदसूरत थी लेकिन उनकी दोनों बेटियाँ बहुत ही खूबसूरत थी, बड़ी वाली बहन का नाम ज्योति था, उसके चूचे बड़े और कसे हुए थे और उसकी गांड काफी उठी हुई थी, कमर पतली… जब चलती थी तो मन करता था पटक के चोद दूँ।
उसकी बहन अनुष्का उससे भी ज्यादा खूबसूरत और अपनी बहन से 3 साल छोटी थी। उसके चूचे नार्मल साइज़ के थे और गांड निकली हुई।
वो अपनी बहन से ज्यादा सेक्सी लगती थी।
एक दिन मैं मैथ्स के प्रश्न हल कर रहा था तभी डोर बेल बजी, मैं उठ कर दरवाजा खोलने गया तो बाहर आंटी खड़ी थी।
मैंने उन्हें अन्दर बुलाया और पानी के लिए पूछा.
उन्होंने थैंक्स बोलते हुए कहा- बेटा, तुम 12वीं में पढ़ते हो। ज्योति अभी 11वीं में है, शाम को तुम मैथ्स में उसकी कुछ मदद कर सकते हो?
मैंने सोचा मौका अच्छा है और झट से हाँ कह दी।
शाम को मैं उसके घर गया, दरवाजा खटखटाया तो उसकी बहन ने दरवाजा खोला.
मेरी आँखें तो उसकी आँखों से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी।
उसने कहा- क्या हुआ, अन्दर नहीं आयेंगे?
मैं खुद को कंट्रोल करते हुए अन्दर घुसा और बोला- ज्योति कहाँ है?
उसने बताया- वो अन्दर कमरे में है!
मैं अन्दर उसके कमरे में चला गया।
ज्योति अपने बिस्तर पर बैठ कर फ़ोन पर कुछ कर रही थी, मुझे आते ही देखकर वो सकपका कर खड़ी हो गई।
मेरी आँखें फटी की फटी रह गई… उसने लूस टीशर्ट और हाफ पैंट पहनी थी, उसकी गोरी चिकनी जांघें देखकर मेरा गला सूख गया, मेरी नजर वहीं टिकी रही।
उसने शायद भांप लिया था कि मेरी नियत ख़राब है। उसने कहा- आइये बैठिये!
और एक कुर्सी मेरे आगे कर दी।
मैंने उस से पानी माँगा और पी कर पढ़ाना शुरू कर दिया।
वो मेरे सामने बिस्तर पर झुक कर बैठी थी और मेरे बताये हुए सवाल बड़ी नादानी से कर रही थी। मेरी नजर उसके टीशर्ट में से झाँकते हुए चूचों पर थी जो उसके झुकने से साफ़ साफ़ दिख रहे थे। मेरी हालत ख़राब हो रही थी।
मैं अभी उसके उरोजों को ही देख रहा था कि अचानक से उसकी बहन आ गई।
शायद उसने मुझे उसकी बहन की चूचियां देखते हुए देख लिया था। वो अन्दर आई और अलमारी खोल कर उसमें से टॉप और जीन्स निकाल कर ले गई।
ज्योति को कुछ देर पढ़ाने के बाद मैंने कहा- अब मुझे चलना चाहिए, आंटी को बुला दो तो मिल कर जाऊँ!
तो उसने कहा- मम्मी इस टाइम मार्केट जाती हैं और 2 घंटे बाद ही आती हैं।
मैंने उसको एक सवाल और बता कर कहा- तुम इसे करो, मैं चलता हूँ।
उसने बिना कुछ बोले सवाल करना शुरू कर दिया।
मैं कमरे से बाहर निकला तो उसने बोला- दरवाजा बंद कर दीजिये।
मैंने दरवाजा बंद करते हुए बोला- तुम मुझे राहुल बुलाया करो।
दरवाजा बंद करके मैं हाल से होता हुआ मेन गेट की तरफ बढ़ा ही था कि मेरे कदम रुक गए। मुझे अपनी आँखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था, हॉल के बगल वाला कमरा हल्का सा खुला था और अन्दर देख कर मेरी हालत ख़राब हो गई।
अन्दर अनुष्का अपने बेडरूम में कपड़े चेंज कर रही थी। उसने अपना टॉप उतार दिया था और अब अपना पजामा उतार रही थी। उसकी गांड देख कर मुझे पसीना आने लगा। शायद उसको कहीं जाना था।
तभी वो अलमारी से कपड़े लेने गई, अब उसने अपनी ब्रा उतार दी।
मेरा लंड खड़ा हो गया, मैं अपना लंड बाहर निकाल कर हिलाने लगा।
अब उसने अपनी पैंटी भी उतार दी। उसकी गांड को देख कर मैं और भी पागल हो गया। जब वो पैंटी उतारने को नीचे झुकी तो उसकी बुर की फांक दिख गई। मैं अब अपनी चरम सीमा पर पहुंचने वाला था और 2 मिनट के लिए मेरे आँखों के आगे अँधेरा छा गया।
जब आँखें खोली तो खुली ही रह गई… मेरे सामने अनुष्का और ज्योति खड़ी थी।
मेरी सिट्ठी पिट्टी गुम हो गई… मैं उनके पैरों पर गिर कर माफ़ी मांगने लगा।
ज्योति बोली- तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इतनी गन्दी हरकत करने की? मम्मी को आने दो, फिर बताती हूँ।
मेरी फट गई, मैं गिड़गिड़ाने लगा और बोला- अनुष्का को नंगी देख कर मैं होश खो गया था, ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी। मैं आगे से इस घर में कदम भी नहीं रखूँगा। बस एक मौका दे दो।
मेरी बात सुन कर अनुष्का हंसने लगी।
ज्योति बोली- ठीक है, एक मौका… लेकिन तुमको पढ़ाने आना होगा, नहीं तो माँ को लगेगा कि मैंने कोई बदमाशी की है इसलिए तुम नहीं पढ़ा रहे।
मैंने हां कर दी और अपने घर चला गया।
अगले दिन 1 बजे दोपहर ही ज्योति आई और बोली- अभी पढ़ाने आओ, माँ मासी के घर गई है और शाम तक आएँगी। फिर मुझे उनके साथ शॉपिंग जाना है।
मैंने हां बोला और 10 मिनट बाद जाकर दरवाजा खटखटाया।
ज्योति ने दरवाजा खोला। उसने स्लीवलेस टॉप और एक नीकर पहना था जो कच्छी की साइज़ का था।
कल की वारदात को याद करते हुए मैंने कदम अन्दर बढ़ाये और उसके रूम में गया लेकिन वहाँ अनुष्का पहले से ही पढ़ रही थी, उसने एक मिनी स्कर्ट और एक टॉप पहना था जो उसकी कमर को नहीं ढक पा रहा था, उसकी नाभि साफ़ साफ़ दिख रही थी.
तभी ज्योति आ गई और बोली- आज ये भी तुमसे पढ़ेगी।
मैं शान्ति से अपनी कुर्सी पर बैठ गया।
आज दोनों ही बहुत ही हॉट लग रही थी लेकिन मैं ज्यादा देख नहीं रहा था।
मैंने बुक मांगी तो ज्योति ने इंग्लिश की बुक दे दी।
मैंने बताया कि मेरी इंग्लिश कमजोर है तो उसने कहा- जो हम लोग बोलेंगी, वही पढ़ाना पड़ेगा।
मैं चुपचाप बुक खोल के बैठ गया और टूटी फूटी इंग्लिश समझाने लगा।
अब अनुष्का की बारी थी तो मैंने बुक मांगी तो उसने बायो की बुक पकड़ा दी और दोनों बहनें हंसने लगी।
मैं गुस्से में आ गया क्योंकि मैं मैथ का स्टूडेंट था, फिर भी बुक खोल कर शुरू से पढ़ाने लगा।
मैं पढ़ा रहा था तो ज्योति ने सवाल किया- ये दिल बायीं तरफ क्यों होता है?
मैं बोला- मुझे नहीं पता!
तो ज्योति ने बोला- दिल की धड़कन कैसे सुनते हैं?
मैं बोला- स्टेथोस्कोप से!
फिर अनुष्का बोली- दीदी मुझे अपने दिल की धड़कन सुनना है!
और जिद करने लगी।
ज्योति उठी और स्टेथोस्कोप लेकर आई और बोली- ये मम्मी का है! लेकिन हम दोनों को इसे इस्तेमाल करना नहीं आता। तुम आज सिखाओ इस्तेमाल करना!
मैंने स्टेथोस्कोप लिया और उसको अनुष्का के कान में लगा के बोला- इसको अपने दिल पर लगाओ।
उसने कोशिश की लेकिन उसको धड़कन नहीं सुनाई दी।
मैंने उसको कोशिश करते रहने को बोला तो ज्योति गुस्सा हो गई और बोली- चुपचाप जो वो कहे, वो करो और उसके दिल पर लगा कर उसकी धड़कन सुनाओ!
मुझे उसके रवैये पर गुस्सा आ रहा था लेकिन मैं मजबूर था, मैंने स्टेथोस्कोप उसके हाथ से लिया और टॉप के ऊपर से ही उसके दिल पर लगाया।
टॉप की वजह से नहीं सुनाई दे रहा है ऐसा बोल कर मैंने टॉप उतारने को बोला।
यह सुन कर अनुष्का झिझक कर बोली- मैं टॉप नहीं उतारूंगी. ऐसे ही अन्दर हाथ डाल कर चेक करो।
शायद उसने ब्रा नहीं पहनी थी।
मैंने हाथ अन्दर डाल दिया मेरी हालत ख़राब थी और उसकी बाईं चूची पर मैंने स्टेथोस्कोप लगाया लेकिन आवाज नहीं आई।
मेरी हालत बिगड़ रही थी, मेरे हाथ कांप रहे थे लेकिन मैंने और जोर से चूची पर दबा दिया मगर फिर भी आवाज नहीं आई।
तभी अनुष्का ने झुंझला कर अपना टॉप निकाल कर फेंक दिया और बोली- अब अच्छे से खोजो!
उसके दोनों चूचे नंगे मेरी आँखों के सामने चमक रहे थे।
मैं हक्का बक्का रह गया और उसके चूचों को देखता ही रह गया। ज्योति ने फटकार लगाते हुए कहा- जो कहा जा रहा है, वो करो नहीं तो हम मम्मी को बतायेंगी।
और वो भी अपना टॉप और ब्रा उतार कर अनुष्का के बगल में बैठ गई।
तभी अनुष्का ने मेरा हाथ पकड़ के झटके से अपनी चूची पर लगाया और झटके की वजह से हाथ से स्टेथोस्कोप छूट गया और हाथ में पूरी चूची आ गई।
अनुष्का के मुख से आह निकल गई। मेरी समझ में अब सब आने लगा था, मैंने अपना कान अनुष्का की बायीं चूची पर लगाया और धड़कन सुनने के बहाने दाहिनी चूची को मुंह में ले लिया।
अनुष्का गर्म हो चुकी थी।
अब मैं ज्योति की चूची भी दूसरे हाथ से दबाने लगा और एक हाथ से अनुष्का की स्कर्ट उतार दी।
ज्योति भी गर्म हो चुकी थी और मेरी शर्ट और पैंट को उतारने लगी.
अनुष्का की बुर पर एक भी बाल नहीं था, मैं उसकी बुर को चाटने लगा और अनुष्का मेरे बाल पकड़ कर मेरे सर को अपनी बुर में धंसाती जा रही थी।
यह बुर की चुदाई की कहानी आप अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं!
इधर ज्योति मुझे पूरा नंगा करके मेरे लंड को चूस रही थी।
अब अनुष्का को बर्दाश्त नहीं हो रहा था तो मैं उसकी गांड के नीचे तकिया रख कर अपना लंड उसके बुर पर रख कर धीरे-धीरे बुर में घुसाने लगा।
बुर बहुत टाइट थी तो लंड जा नहीं रहा था। तो ज्योति से नारियल का तेल मांग कर उसकी बुर पर लगाया और ज्योति से अपना लंड चुसवाया। फिर एक झटका देकर मैंने आधा लंड उसकी बुर में घुसा दिया।
वो चीख पड़ी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
मैंने फिर धीरे धीरे उसको झटके लगाने शुरू किये और धीरे धीरे अनुष्का को मज़ा आने लगा, वो गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी।
उस दिन मैंने दोनों बहनों की जम कर चुदाई की। जब भी मौका मिलता है मैं चुदाई करने के लिए पहुंच जाता हूँ।
आपको बुर की चुदाई कहानी कैसी लगी?

रंगीन सुहागरात




मेरी दीदी का नाम नीतू है, वो मुझसे तीन साल बड़ी है, उनका रंग गोरा चिट्टा है और हाँ उनके होंटों के नीचे एक काला तिल है, जिसकी वजह से वो बहुत सेक्सी लगती है! उनकी शादी एक अनिवासी भारतीय लड़के से यानि कि मेरे जीजा जी से हो गई, जो कि दुबई में नौकरी करते हैं ! दीदी उन्हीं के साथ रहती है। वैसे तो वो दोनों बहुत खुश रहते हैं मगर शादी के दो साल गुजर जाने के बाद भी उनकी कोई औलाद न होने से दीदी उदास सी रहती है!
मेरा नाम राज है मैं भी एक अनिवासी भारतीय हूँ और कनाडा में एक कम्पनी में जॉब करता हूँ। यहाँ आने से पहले मेरे माँ-बाप का स्वर्गवास हो गया था इसलिए दीदी, जीजाजी के सिवा मेरा और कोई नहीं है!
एक दिन मैं अपने जीजा जी के साथ फ़ोन पर बात कर रहा था तो बातों ही बातों में मैंने जीजा जी को दीदी के साथ अपने पास घूमने आने का निमंत्रण दे दिया। तभी जीजाजी ने यह कह कर टाल दिया कि उनको अभी छुट्टी नहीं मिल सकती, उन पर कम्पनी के काम का बहुत भार है।
थोड़ा रुकने के बाद जीजा जी ने कहा- मैं कुछ दिनों के लिए तेरी दीदी को तेरे पास भेज देता हूँ, उसकी नौकरी भी छुट गई है, सारे दिन भर घर में बोर हो जाती है, वो पहले से काफी उदास सी रहने लगी है, कुछ दिन पहले तुझे ही याद कर रही थी, शायद वो तुझको देखना-मिलना चाहती है। वैसे भी राखी का त्यौहार नजदीक आ रहा है, दोनों भाई-बहन मिल भी लेना और उसको कहीं घुमा भी देना, शायद इसी बहाने उसका मन ही बहल जाए !
मैंने कहा- ठीक है जीजा जी ! जैसा आप कहें !
और कुछ दिन बाद वो दिन भी आ गया जब दीदी मेरे पास आने के लिए दुबई से रवाना हुई। मैं भी दीदी को लेने के लिए ठीक समय पर एयरपोर्ट पहुँच चुका था। कुछ समय बाद दीदी की फ्लाईट लैण्ड होने की घोषणा हुई। मैंने अपनी आँखें एग्जिट-गेट पर जमा दी।
कुछ समय बाद मैंने दीदी को लोगों के साथ बाहर आते देखा तो मैं दीदी को देखता ही रह गया। सच क्या लग रही थी दीदी ! मैंने कभी भी दीदी को इस रूप में नहीं देखा था। उन्होंने ऊँची ऐड़ी की सेंडल पहनी हुई थी और काले रंग की फेंसी साड़ी और हाफ कट वाला ब्लैक ब्लाउज़ पहना हुआ था। ब्लाउज़ का गला काफी खुला और बड़ा होने से उनके आधे नंगे स्तन ऊपर से साफ दिखाई दे रहे थे। उनके वक्ष के ऊपर एक काला तिल था जो अलग ही चमक रहा था जैसे दूध में मक्खी !
तभी दीदी की नज़र मुझ पर पड़ी तो मैंने हाथ हिला कर उनको अपने होने का इशारा किया और दीदी ने एक हल्की सी मुस्कान देकर मेरी ओर बढ़ी और मेरे नजदीक आकर मेरे गले लगने लगी। मैंने भी मोके का फ़ायदा उठाया और दीदी की नंगी गोरी चिकनी कमर को अपने दोनों हाथों से सहलाते हुए जकड़ लिया। वहाँ खड़े सारे लोग शायद यही सोच रहे होंगे कि हम पति पत्नी हैं। फिर मैंने दीदी का सामान उठाया और हम दोनों घर की ओर चल दिए !
घर पहुँच कर दीदी फ्रेश होने के लिए बाथरूम में चली गई ( क्यूँकि गर्मी के दिन थे और मेरी दीदी को बहुत पसीना आता है और वो तो उस दिन पसीने से बहुत भीग चुकी थी) मैंने दीदी जी का सामान सेट कर दिया और थोड़ी देर बाद दीदी भी फ्रेश हो कर बाथरूम से बाहर आ गई !
जैसे ही मैंने उनको देखा तो मेरी आंखें फटी की फटी रह गई। दीदी सिर्फ पेटीकोट-ब्लाउज़ में ही बाथरूम से बाहर आ गई थी। काले पेटीकोट और ब्लाउज में उनका गोरा-गोरा अंग एकदम सोने की तरह चमक रहा था। दीदी को देख कर मेरे अंदर थोड़ी अजीब सी घबराहट होनी शुरु हो गई। मैं दीदी को न चाह कर भी देखना चाहता था ! मैं कभी दीदी के वक्ष के ऊपर विराजमान काले तिल को देखता तो कभी उनकी नंगी कमर को, तो कभी उनके नाड़े वाले नंगे हिस्से को !
तभी दीदी ने मेरे पास आकर मेरे सर में प्यार से हाथ फेर कर पूछा- किया हुआ भईया? कहाँ खो गए ?
मैं थोड़ा घबरा कर और शरमा कर बोला- कुछ नहीं दीदी ! बस मैं….. आप काले कपड़ों में बहुत सुंदर लगती हो !
दीदी समझ गई कि मैं क्यों ऐसे बोल रहा हूँ। दीदी शरमा कर बोली- भाई मैं क्या करूं, बहुत गर्मी है और साड़ी में बहुत घुटन हो रही थी, इसलिए मैंने साड़ी अलग निकाल दी!
मैं बोला- दीदी कोई बात नहीं, हम दोनों के सिवा और कोई भी नहीं है यहाँ पर ! और मैं बिल्कुल फ्रैंक लड़का हूँ, तुम निश्चिंत रहो, मैं तालिबानी जैसा भी नहीं हूँ कि जो अपनी इतनी सुन्दर दीदी को बुरके में पसंद करे !
दीदी हंस दी और बोली- भईया, तू तो बहुत शैतान हो गया है ! चल जल्दी से तू भी नहा धो ले ! आज राखी है राखी नहीं बंधवानी क्या !
फिर मैं भी बाथरूम मैं नहाने चले गया। बाथरूम में बहुत ही अच्छी खुशबू आ रही थी। आज से पहले कभी ऐसी खुशबू बाथरूम में नहीं थी ! मैं समझ गया कि यह खुशबू दीदी के बदन की है! आज मैं इस खुशबू में समां जाना चाहता था और मैंने पहली बार अपनी दीदी के बारे में कर उनके नाम की मुठ मार दी। इसका एक अलग ही आनंद आया और जब मैं बाथरूम से नहा धो कर बाहर आया तो दीदी बोली- क्या बात है, बड़ी देर लगा दी तूने?
मैं बोला- क्या करूँ दीदी जी ! आज मेरा तो बाथरूम से बाहर आने का मन ही नहीं कर रहा था !
दीदी बोली- क्यों ?
मैं चुप रहा और मैंने दीदी को एक स्माइल दी ! दीदी भी शायद मेरा इशारा समझ गई थी और वो शरमाकर बोली- लगता है अब जल्द से जल्द तेरे लिए एक लड़की तलाशनी पड़ेगी ! बोल मेरे राजा भइया, तुझको कैसी लड़की पसंद है, मैं अपने राजा भइया के लिए वैसी ही लड़की लाउंगी !
मैं दीदी से बोला- सच !
दीदी हँस कर बोली- मुच !
मैंने तुंरत ही दीदी का हाथ पकड़ा और उनको शीशे के आगे ले जा कर बोला- मुझे ऐसी लड़की चाहिए !
दीदी थोड़ी शरमा कर बोली- पागल ऐसी लड़की लायेगा तो सुहागरात के बदले रक्षा बंधन मनाना पड़ेगा तुझे !
और जोर जोर से हँसने लगी!
मैं दीदी के पीछे की तरफ खड़ा था और दीदी मेरे आगे थी। हम दोनों भाई बहन एक दूसरे को शीशे में देख कर बातें कर रहे थे !
मैं बोला- दीदी अगर आप जैसी सुंदर लड़की मुझे मिल जाए तो मैं उससे राखी भी बंधवाने के लिए तैयार हूँ !
दीदी बोली- ऐसा क्या है मुझमें जो तू अपनी दीदी का इतना दीवाना हुआ पड़ा है ! क्या देखा तूने मुझमें ?
मैं बोला- दीदी आप गुस्सा तो नहीं होंगी ना !
दीदी बोली- मैं आज तक अपने राजा भइया से गुस्सा हुई हूँ जो अब होंऊगी !
मैं बोला- दीदी ! मैं सच में तुम्हारा दीवाना हूँ !
जब से मैंने तुम्हें एयर पोर्ट पर देखा है, मैं तुम्हारा दीवाना हो गया हूँ। पता नहीं क्यों मैं तुम्हें पाना चाहता हूँ, तुम्हें छूना चाहता हूँ, तुम्हें तुम्हारे नाज़ुक होटों के नीचे काले तिल का अहसास दिलाना चाहता हूँ !
और मैंने आव देखा न ताव ! और दीदी की गर्दन के नीचे प्यार से एक किस कर दिया। दीदी मुझे शीशे में देख रही थी और वो वैसे ही खड़े रह कर मेरे गाल पर प्यार से हाथ फेरने लगी ! मैंने भी दीदी को अपने दोनों हाथों से आगे से जकड़ लिया और दीदी ने अपनी दोनों आँखें बंद कर ली जिससे मेरा थोड़ा और साहस बढ़ा और दीदी के कान में मैंने हल्की सी आवाज में ‘ आई लव यू दीदी ‘ बोल दिया और बोला- अगर आप मेरी बहन न होती तो मैं आप को ज़रूर प्रपोज़ करता ! आप कितनी सुंदर हो ! मैंने आप सी सुंदर कोई लड़की नहीं देखी ! हम भाई बहन क्यों हैं ?
दीदी ने अभी तक अपनी आँखें बंद कर रखी थी क्योंकि मैं उनके पेट पर, नाभि पर हल्का-हल्का हाथ फेर रहा था। अचानक मैंने दीदी के पेटीकोट के नाड़े की तरफ हाथ बढ़ाया तो दीदी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और गर्दन हिला कर मना करने लगी और बोली- भईया मैं तुम्हारी बहन हूँ !
मैंने बोला- मैं जानता हूँ ! आज मैं सारे रिश्तों को भुला देना चाहता हूँ, तुम मेरी हो और मैं आज अपनी बहन की बाँहों मैं समा जाना चाहता हूँ !
दीदी बोली- किसी को मालूम चल गया तो समाज में हमारी थू-थू हो जायेगी !
मैंने कहा- हमें समाज देखने थोड़े ना आ रहा है !
दीदी चुप हो गई और कुछ सोचने के बाद मेरे से लिपट गई और रोने लगी।
मैंने पूछा- दीदी क्या हुआ? क्यों रो रही हो ?
तो बोली- मैं बहुत प्यासी हूँ ! तेरे जीजाजी से मुझे वो खुशी नहीं मिली जो हर औरत को शादी के बाद अपने पति से मिलती है !
मैं बोला- दीदी साफ साफ बताओ ना ! मैं समझ नहीं पा रहा हूँ !
वो बोली- तेरे जीजा जी मर्द नहीं हैं !
यह सुनकर मुझे तो पसीना आ गयाऔर मैं अंदर ही अंदर सोचने लगा- यानि कि दीदी अभी कुँवारी हैं और उनकी सील भी नहीं टूटी !
मैंने दीदी के आँसू को अपनी जीभ से चाट कर साफ किया और बोला- दीदी ! तुम चिंता मत करो मैं हूँ ना ! तुम बस मुझको यह बताओ कि तुम मुझको पसंद करती हो?
दीदी बोली- जान से भी ज्यादा !
क्या तुम मुझे भाई की जगह अपना पति मानोगी? मैं तुम्हें हर वो खुशी दूंगा जो तुम चाहती हो !
दीदी ने फ़ौरन मेरे होटों पर किस कर दिया और बोली- आज से तुम ही मेरे पति हो ! मेरा तन-मन सब तुम्हारा है ! जो तुम बोलोगे, वो मैं करूंगी !
मैंने दीदी को बोला- आज मैं तुमसे शादी करूंगा !
यह सुन कर दीदी जल्दी से सिंदूर और अपना मंगल सूत्र ले कर मेरे पास आ गई। मैंने उनकी मांग भर कर मंगल सूत्र उनके गले में पहना दिया।
दीदी बोली- भइया ! मैं अपने कमरे में जा रही हूँ, तुम थोड़ी देर बाद कमरे के अंदर आ जाना ! मैं तुम्हारा इन्तजार करूंगी !
और जब मैं थोड़ी देर बाद दीदी के कमरे में गया तो दीदी सज-संवर के अपने शादी के जोड़े में घूँघट ओढ़े पलंग पर बैठी मेरा बेसबरी से इंतजार कर रही थी। मैं दीदी के पास गया और प्यार से उनका घूँघट उठाया और उनकी ठुडी को अपने हाथ से ऊपर उठाने के साथ ही उनके होटों का चुम्बन ले कर बोला- ओह दीदी ! आई लव यू ! मैंने आज तक तुम जैसी सेक्सी लड़की नहीं देखी !
और उनके होटों के नीचे वाले काले तिल को अपने दाँतों में बुरी तरह दबोच लिया और चूसने लगा। दीदी को दर्द हो रहा था मगर दीदी मुझ से भी ज्यादा प्यासी थी, उसे दर्द में भी मज़ा आ रहा था।
तभी मैंने दीदी के ब्लाउज़ को अपने दोनों हाथों से फाड़ दिया और उनके गोरे गोरे आम के जैसे बूब्स बाहर आ गये। मैं उनको चूसने लगा। थोड़ी देर बाद दीदी ने मेरी पैन्ट की ज़िप खोल कर मेरे लंड को बाहर निकाला और अपने कोमल गोरे हाथों से उसे सहलाने लगी। कुछ देर बाद जब मेरा लंड लौड़ा बन गया तो उसको अपनी जीभ से चाटने, सहलाने लगी और होटों से रगड़ कर उसे खड़ा कर दिया !
हम दोनों भाई बहन नंगे थे, मैंने दीदी को बिस्तर में लिटा दिया और उनकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा।
दीदी ओह माय भईया डार्लिंग ! आई लव यू ! बोल रही थी।
मैंने अपनी दीदी को गीध की तरह नौचना शुरु कर दिया। कुछ देर बाद जब मैंने अपनी बहन की चूत में अपना लौड़ा डाला तो दीदी ने उई माँ ! बोल कर मुझको जोर से जकड़ लिया और मुझको फ्रेंच किस करने लगी और अपने दोनों हाथों को मेरे चूतड़ों पर रख कर भइया और जोर से ! और जोर से ! बोलने लगी।
कुछ देर बाद मैंने दीदी को डौगी स्टाइल में चोदना शुरू किया। दीदी के गद्देदार चूतड़ को देख मैं ललचा गया और उनके चूतड़ चाटने लगा। दीदी को मैंने सारी रात चोदा !
सुबह जब मैं जागा तो दीदी मेरे लंड को चूस रही थी, मुझको प्यासी आँखों से देख रही थी और मेरा लौड़ा खड़ा करके उसके ऊपर बैठ गई और फिर दुबारा से मैंने दीदी को चोदना शुरु कर दिया।
हम दोनों चार साल बीत जाने के बाद भी हमेशा एक दूसरे के साथ सेक्स में डूबे रहते हैं।
सच अपनी बहन के साथ कितना मजा आता है, मैं क्या बताऊँ !
अब हम दोनों भाई बहन एक पति पत्नी की तरहं जिन्दगी जी रहे हैं। मेरी दीदी से मेरी एक लड़की हुई है …..!

घर की बात सेक्स कहानियाँ




मैं आप लोगों को आज अपने जीवन की एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ।। मेरा नाम राहुल है और मैं एक बिज़नसमैन हूँ। मेरे घर में हम चार लोग हैं- पिताजी, माँ, मैं, और मेरी छोटी बहन !
बात आज से 4 साल पहले की है जब मैं बारहवीं कक्षा में था, मेरी बहन दसवीं में थी। मेरे पिताजी अक्सर घर देर से ही आते थे क्योंकि बिज़नस की वज़ह से उन्हें देर हो जाती थी और माँ ज्यादातर अपने घर के काम में या फिर टीवी देखने में व्यस्त रहती थी। मेरी बहन जिसका नाम रिया है अधिकतर पढ़ाई करती रहती थी।
मैंने कभी उसे गलत नज़र से नहीं देखा था। मगर एक दिन मैं अपने कंप्यूटर पर ब्लू फिल्म देख रहा था कि एकदम से रिया मेरे कमरे में आ गई मैंने उसको देखते ही कंप्यूटर बंद कर दिया मगर उसने सब देख लिया था लेकिन वो कुछ बोली नहीं। मैं उससे कुछ नहीं कह पाया, वो हिम्मत करके मेरे पास आई और बोली- भईया मुझे यह सवाल नहीं आ रहा, इसको हल करने में मेरी मदद करो। मैंने कहा- ठीक है !
लेकिन मैं उससे नज़रें नहीं मिला पा रहा था। मैंने उसका सवाल हल कर दिया। फिर वो जाने लगी तो मैंने उससे बोला- जो भी तुमने देखा है, वो किसी को मत बताना !
तो वो बोली- भईया, मैं किसी को नहीं बताउंगी पर यह सब अच्छी चीज़ नहीं हैं, आप मत देखा करो !
मैंने उससे कहा- ठीक है !
फिर वो चली गई लेकिन उस दिन मुझे उसे देख कर कुछ अजीब सा महसूस हुआ, मेरे दिल में उसके लिए गलत ख्याल आने लगे। मैं आपको बता दूँ कि रिया देखने में बहुत ही सेक्सी है। उसका फिगर 34-26-34 है, रंग हल्का साँवला है। जो भी उसको एक बार देख ले, उसका लंड अपने आप ही खड़ा हो जाए।
दो दिन बाद दोपहर के वक़्त माँ घर का काम निपटा कर सो रही थी और मैं अपने कमरे में पढ़ रहा था। इतने में रिया आई और बोली- भईया उठो, मुझे एक सवाल समझ नहीं आ रहा, मुझे समझा दो।
तो मैं उठ कर उसे सवाल समझने लगा। लेकिन आज उसके मेरे पास बैठने से मुझे कुछ-कुछ हो रहा था, उसकी खुशबू मेरी साँसों में भर रही थी। मैं सवाल पर ध्यान नहीं लगा पा रहा था कि इतने में वो बोली- भईया, क्या बात है ?
तो मैं बोला- मुझे बहुत नींद आ रही है इसलिए मैं यह सवाल नहीं कर पा रहा हूँ !
तो वो बोली- भईया, नींद तो मुझे भी आ रही है ! ऐसा करते है ख़ी कुछ देर के लिए सो जाते हैँ, बाद में सवाल कर लेंगे।
इतना कह कर वो आपने कमरे की तरफ जाने लगी तो मैंने उससे कहा- रिया, कहां जा रही है? यहीँ पर सो जा ! थोड़ी देर में तो उठ कर सवाल करना ही है।
तो वो बोली- ठीक है !
फिर वो मेरे बगल में आकर सो गई। मैं भी सोने का नाटक करने लगा। लेकिन नींद तो आ ही नहीं रही थी। थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद मैंने आपना एक हाथ हिम्मत करके उसके चूचों पर रख दिया और कोई हरकत नहीं की ताकि उसको ऐसा लगे कि गलती से नींद में रखा गया हो।
थोड़ी ही देर में उसकी साँसें तेज चलने लगी। फिर मैंने हिम्मत करके उसकी टांग के बीच अपनी टांग फंसा दी। अब वो मेरी पकड़ में थी, उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी पर उसने अभी तक कोई विरोध नहीं किया तो मेरी हिम्मत बढ़ गई।
मैंने अपने हाथ से उसके चूचे मसलना चालू कर दिया, कुछ देर बाद वो बोली- भईया, यह क्या कर रहे हो?
तो मैंने उससे साफ़ साफ़ कह दिया- मैं तुझे प्यार करता हूँ और जब भी तू मेरे सामने आती है तो मैं अपने होश खो बैठता हूँ।
वो बोली- भईया, यह सब सही नहीं है ! अगर किसी को पता चल गया तो? और वैसे भी हम भाई-बहन हैं।
मैंने उससे कहा- किसी को पता नही चलेगा ! और भाई-बहन हैं लेकिन हैं तो लड़का-लड़की ! इतना तो सब में ही चलता है ! आखिर एक दिन तो तुम्हें किसी न किसी से चुदना ही है तो अपने भाई से ही क्यों नहीं !
इतना कह कर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और पैंटी के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चूत सहलाने लगा। वो सिसकारियाँ लेने लगी और साथ में हल्का सा विरोध भी कर रही थी। तो मैंने उससे कहा- तुम मेरा साथ दो तो तुम्हें बहुत मज़ा आएगा और घर की बात घर में ही रहेगी।
तो उसने करवट ली और मेरे चेहरे के सामने अपना चेहरा ला दिया और बोली- ठीक है, लेकिन किसी को पता नहीं चलना चाहिए !
मैंने उससे कहा- तू फिक्र मत कर !
फिर उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और दस मिनट तक हम एक दूसरे के होंठ चूसते रहे। फिर उसके बाद मैंने उसका कुरता उतार दिया और फिर ब्रा भी उतार दी।
क्या क़यामत लग रहे थे उसके चूचे !
मैंने एक चूचे को मुँह में ले लिया और दूसरे को हाथ से मसल रहा था और उसकी सिसकारियाँ बढ़ती ही जा रही थी। फिर उसने मेरी पैंट खोल कर मेरा लंड पकड़ लिया और उसे अपने हाथ से दबाने लगी। मुझे लगा जैसे कि मैं जन्नत में पहुँच गया।
इतनी में मैंने उसकी जींस और पेंटी नीचे सरका दी। फिर उसने मेरी टी-शर्ट भी उतार दी। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे एक दूसरे के बगल में लेटे थे। मैंने देर न करते हुए उसे अपनी बाहों में समेट लिया और कहा- मैं तुम्हारे बदन की गर्मी लेना चाहता हूँ, इसका अहसास लेना चाहता हूँ !
रिया बोली- केवल आप ही नहीं मैं भी यही चाहती हूँ !
उसका इतना कहना था कि मैं तो खुशी से पागल हो गया। फिर मैंने अपनी जीभ से उसका पूरा बदन चाटा, फिर मैं उसकी टांगों के बीच गया और उसकी गुलाबी पंखुड़ी वाली चूत मेरी आँखों के सामने थी। उसकी चूत में हल्के-हल्के बाल थे। मैंने जैसे ही अपनी जीभ उसकी चूत पर रखी, वो तो जैसे पागल ही हो उठी और उसके पूरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया।
वो बोली- भईया, मैं मर जाउंगी !
और मैंने उसकी चूत के अन्दर अपनी जीभ घुसा दी तो वो बोली- भईया, मुझे भी आपका लंड चूसना है !
तो हम 69 की मुद्रा में आ गए। अब हम दोनों 10 मिनट तक एक-दूसरे को ऐसे ही चूसते रहे और फिर हम दोनों एक एक करके झड़ गए। इसके बाद हम दोनों एक दूसरे के ऊपर लेट गए। थोड़ी ही देर में हम फिर से गर्म हो गए और मैं उसकी चूत में ऊँगली करने लगा तो वो बोली- भईया, अब नहीं रहा जाता ! अपना लंड अन्दर डाल दो !
मैं उसकी टांगो के बीच आ गया, उसकी चूत अभी कुँवारी थी और मैं उसे दर्द नहीं पहुँचना नहीं चाहता था, इसलिए मैंने पहले अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाया, फिर उसकी चूत पर भी थूक से मालिश कर दी। मेरा लुंड सात इंच लम्बा और तीन इंच मोटा है।
उसके बाद मैंने अपना लंड रिया की चूत पर लगाया और हल्के-हल्के लंड को अन्दर करने लगा, पर जा नहीं रहा था इसलिए मैंने एक हल्का सा धक्का लगा दिया तो रिया जैसे तड़प सी गई और उसके मुँह से आह की आवाज़ निकल गई। मेरे लंड का सुपारा अन्दर जा चुका था। फिर मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया और उसके चूचे मुँह में लेकर चूसने लगा। फिर थोड़ी देर बाद मैंने हल्के-हल्के लंड अन्दर डालना चालू किया और बीच बीच में हल्का सा धक्का भी मार देता था जिससे कि उसकी चीख निकल जाती थी। लेकिन मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख रखे थे जिससे उसकी चीख बाहर न जाये। अब तक मेरा पूरा लंड उसकी चूत में जा चुका था। उसकी चूत बहुत ही कसी थी और मैं हल्के-हल्के अपने लंड को अन्दर-बाहर करने लगा। शुरु में तो उससे थोड़ा दर्द हुआ पर फिर उसे भी मज़े आने लगे और वो अपनी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी।
अब हम दोनों चुदाई का पूरा आनंद ले रहे थे। वो कह रही थी- भईया और जोर से !
मैं भी रिया से कह रहा था- देख ! बहन को अपने भाई से चुदने में कितना मज़ा आता है !
वो बोली- हाँ भईया, सही में बहुत मज़ा आ रहा है ! यह तो सबको करना चाहिए ! लेकिन दुनिया के ये झूठे रिवाज़ हमें रोके रखते हैं। भईया, मैं तो ये सोचती हूँ कि कोई भी किसी के साथ भी चुदाई कर सकता है। इससे क्या फर्क पड़ता है कि वो रिश्ते में क्या लगते हैं, आखिर वो हैं तो मर्द और औरत ही !
और हम ऐसे ही बातें करते करते चुदाई का आनंद लेते रहे। शायद रिया एक बार झड़ चुकी थी, अब मैं भी चरम सीमा तक पहुँच चुका था और फिर उसके बाद हम दोनों एक साथ एक दूसरे में समां गए और अपना अपना पानी एक दूसरे में मिला दिया और एक दूसरे को पूरी ताकत से पकड़ लिया।
फिर हम दस मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे और उसके बाद बाथरूम में जा कर एक दूसरे को साफ़ किया। हम लोग उस वक़्त भी बिलकुल नंगे थे, मुझे रिया के चूतड़ दिखाई दिए बिल्कुल गोल-गोल और मुलायम ! बिल्कुल गोरे-गोरे और चिकने !
मेरा लंड फिर से जोर मारने लगा। मैं उसके पास गया और उसे अपनी बाहों में उठा लिया और ले जाकर उसे फिर से बिस्तर पर डाल दिया।
वो बोली- भईया, अब क्या?
मैंने उससे कहा- बहन, मुझे तेरी गांड मारनी है !
तो वो बोली- नहीं भईया ! मुझे बहुत डर लगता है, गांड मरवाने में तो बहुत दर्द होगा !
तो मैंने उससे कहा- मैं दर्द नहीं करूँगा, आराम आराम से करूँगा !
वो बोली- भईया, मार लेना मेरी गांड, लेकिन अभी नहीं, अभी बहुत देर हो गई है और माँ भी उठने वाली होगी हम गांड का प्रोग्राम किसी और दिन करेंगे।
मैं मान गया और उसके होठों का एक लम्बा चुम्मा लिया और उसके चूचे भी दबाये। फिर हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और फिर रिया चाय बनाने चली गई।
मैंने और रिया ने मिलकर चाय पी। फिर वो अपने कमरे में चली गई।
मैंने रिया की गांड कैसे मारी, यह मैं अगली कहानी में बताऊंगा।

मौसी की गांड मारी



हेलो फ्रेंड, माय नाम इस राजवंत एंड आई ऍम फ्रॉम पंजाब माय ऐज इज २४ इयर, हाइट इज ५ फिट ९ इंच. रंग गोरा है और एथलेटिक बॉडी और लंड का साइज़ ६.५ इंच है. ये कहानी मेरी और मेरी मासी की है.मेरी मासी की उम्र ३६ साल है, हाइट ५.३ इंच और रंग गोरा है. टिपिकल पंजाबी बॉडी है. बड़े बूब्स और बाहर निकली हुई गांड. हमेशा पंजाबी सूट पहनती है. मेरा मौसा दुबई में रहते है. मेरी मासी का नाम राज है और उनके दो बेटे है और एक बेटी है.
बात उन दिनों की है, जब एक बार मासी ने मुझे अपने यहाँ बुलाया. क्योंकि उनके बच्चे छोटे है और उनके घर कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था. मैं घर की कंस्ट्रक्शन के काम पर नज़र रखता था और उनको रॉ मटेरियल लाकर देता था. गर्मियों ने दिन थे. मेरी मासी के बच्चे अपने नाना के घर चले गये. पर काम की वजह से मैं और मासी नहीं जा पाए. एकदिन, बहुत तेज बारिश आ गयी और कंस्ट्रक्शन का काम छोड़कर मजदुर अपने- अपने घर चले गये. मैं जानवरों को चारा डाला और जानवरों को अन्दर बांध दिया. मेरी मासी का घर गाँव से बाहर खेतो में है, जहाँ कोई ज्यादा आता- जाता नहीं था. बारिश रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी. बारिश की वजह से सब कुछ भीग गया था. मासी ने आंगन में रस्सी पर सुख रहे कपड़ो को उतारा, तो उनका सूट भीग गया और उन्होंने गर्मी के कारण बहुत पतला सूट पहना था. उनके भीगे सूट से उनका पूरा जिस्म चिपक रहा था. मैंने नोटिस किया, कि उन्होंने काली ब्रा पहनी थी और पेंटी नहीं पहनी हुई थी.
अचानक उनका ध्यान मेरी तरफ गया और उन्होंने एक हलकी सी स्माइल दी. शायद वो समझ गयी थी, कि मैं क्या ध्यान से देख रहा हु. ख़ैर, हम अन्दर आ गये और कपड़े चेंज किये. मैंने टीशर्ट और निकर पहन ली और मासी ने दूसरा सूट. मासी ने चाय बना दी. बारिश कुछ कम हुई पर लगातार जारी थी. कुछ देर बाद, हमारी लाइट भी चली गयी. मणि ने खाने के बारे में पूछा, तो मैंने मना कर दिया कि भूख नहीं है. ख़ैर रात को बारिश रुक गयी, पर लाइट नहीं आई. तो मैंने मासी से कहा, कि मैं छत पर जा रहा हुसोने के लिए. बाहर ठंडी हवा चल रही थी. तो मासी ने कहा, कि वो भी साथ ही चल रही है. हमने नीचे का डोर लॉक किया और कुत्ते को खुल्ला छोड़ दिया और खुद छत पर चले गये. मैंने अपना बिस्तर चारपाई पर लगाया और मासी मेरे साथ ही लेट गयी. उनका फेस मेरी तरफ था. हम बातें करने लगे. सब तरफ अँधेरा था, बातो- बातो में, मासी ने मुझसे पूछा कि तब क्या देख रहे थे. तो मैंने बोला – कब? तो मासी ने कहा, कि भोला मत बन.तुझे सब पता है. तो मैंने कह दिया कि आप गीले कपड़ो में बहुत अच्छी लग रही थी और सेक्सी भी. मासी हँसने लगी और मुझे मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछा. मैंने कहा, कि हाँ है. तो उन्होंने पंजाबी में पूछा, कि मैंने उसकी ली है कि नहीं? तो मैं चौक गया. पर कह दिया – “नहीं”. तो मासी बोली, तो फिर गर्लफ्रेंड रखने का क्या फायदा.
मैंने मासी से पूछा, की मौसा यहाँ नहीं रहते, तो आप क्या करती है. उन्होंने कहा, कि किसी को बताना मत. उसने कहा – कि वो गाजर- मुली या किसी और से काम चला लेती है. पर नहीं चुद्वाती है. तो मैंने पूछा – क्यों? वो बोली – उसकी एक बेटी है और अगर किसी को पता चल गया तो बड़ी बदनामी होगी. उस पर असर पड़ेगा. इन बातो से मेरा लंड खड़ा हो चूका था, मैंने मासी का हाथ पकड़ा तो उसने कुछ नहीं कहा. मेरी हिम्मत बढ़ गयी और मैंने मासी का हाथ अपने लंड पर रख दिया. मासी ने फोरन मेरा लंड पकड़ा और मैं उन्हें लिप किस करने लगा. ३-४ मिनट किस के बाद, मैंने मासी की कमीज़ उतार दी और सलवार का नाडा खोलकर उसे भी उतार दिया और खुद भी पूरा नंगा हो गया. मैंने अपनी मासी का पूरा शरीर चूमना स्टार्ट कर दिया. सर से लेकर पेरो तक.
फिर मैंने मासी को ६९ पोजीशन में लेकर उसकी चूत चाटनी शुरू की और उसने मेरा लंड अपने मुह में लेकर चुसना शुरू कर दिया. मेरी जीभ ने असर दिखाया और मासी की चूत ने पानी छोड़ दिया. ख़ैर, मैं सारा नमकीन पानी पी गया और मासी मेरा लंड चूस रही थी. फिर, मैंने मासी को उठाकर चारपाई पर लिटाया और उनकी टांगो के बीच में बैठ गया. और अपना लंड उनकी चूत के साथ सटा दिया. फिर, मैंने एक जोरदार धक्का लगाया और मेरा आधा लंड उनकी चूत में चले गया. उनके मुह से हलकी सी चीख निकली.
फिर मैंने दो- तीन धक्के और लगाये. तो मेरा पूरा लंड उनकी चूत में उतर गया. मैं रुक कर उनके बूब्स चूसने लगा और फिर धक्के मारने शुरू किये. अब मासी भी मेरा साथ दे रही थी. अचानक मासी की आवाज़ निकलने लगी और उसने अपनी दोनों टाँगे हवा में उठा ली. और अपनी गांड उठा- उठा कर ४-५ जोरदार झटके मारे और पानी छोड़ दिया. उन्हें देखकर मुझे भी जोश आ गया और मैंने स्पीड बड़ा दी. २-३ मिनट बाद, मैं भी उनकी चूत में ही झड़ गया. फिर, मैं मासी के ऊपर से उतर गया.
फिर मासी ने मेरा लंड अपने मुह में लिया और चूसने लगी. देखते ही देखते, मेरा लंड दोबारा खड़ा हो गया. मैंने मासी को अपने बॉल लिक्क करने को कहा. तो उसने वैसे ही किया. वो बारी- बारी मेरा एक बॉल मुह में लेकर चूसती. कुछ देर बाद, वो मेरे ऊपर आ गयी और अपनी चूत के साथ मेरा लंड लगा कर उसपर बैठ गयी. उनकी चूत मेरा लंड पूरा निगल गयी और वो मेरे लंड पर उठ- बैठ रही थी. वो मेरा लंड तक़रीबन सारा बाहर निकालती और फिर पुरे जोर से अपनी गांड नीचे लाती. मैं तो जैसे स्वर्ग में था. एक बार बीच में रूककर उसने अपनी चूत को मेरे लंड पर टाइट किया और मेरे निप्पल मुह में लेकर चूसने लगी, तो मुझे बहुत मज़ा आया. कुछ देर बाद, वो थक गयी और मैंने उन्हें नीचे उतार लिया और छत पर दिवार के सहारे लगाकर घोड़ी बनाया और लंड उनकी चूत में डालकर झटके मारने लगा. कुछ देर बाद, वो झड़ने वाली थी, तो उसने अपनी गांड मेरे लंड पर जोर से आगे- पीछे करनी शुरू कर दी और कुछ देर बाद, उसने और मैंने एक साथ पानी छोड़ दियां.
फिर, छत पर हमने खड़े होकर देखा. तो हर तरफ अँधेरा था. मैं उसके पीछे आ गया और खड़ा हो गया. और लंड को उसकी गांड पर रगड़ने लगा. वो भी अपनी गांड पीछे करके मेरे लंड पर दवाब डाल रही थी. फिर, वो मेरी तरफ फेस करके नीचे बैठ गयी और मेरा लंड पकड़ कर मुह में लेकर चूसने लगी. जब लंड थोडा खड़ा हुआ, तो मैंने उसकी माउथ फकिंग शुरू कर दी. उसके हाथ मेरे चुतड पर थे और ५-६ मिनट के बाद, मैंने उससे कहा – मेरा पानी निकलने वाला है. मैंने लंड बाहर निकालने की कोशिश की, पर उसने लंड बाहर नहीं निकाला और जब मेरे लंड पानी छोड़ा. तो वो सारा पानी पी गयी और मेरा लंड भी चाट कर साफ़ कर दिया.
हम चारपाई पर बैठ कर बात करने लगे. मैं उसके थाई को सहला रहा था. वो बोली – क्या अभी दिल नहीं भरा? मैंने कहा, कि कैसे भरेगा. तुम्हारा अभी एक होल तो अनटच है, तो वो हंस पड़ी. वो बोली – उसे भी फाड़ डाल. मैंने कब मना किया है. उसने मेरे लंड अपने हाथ में ले लिया और सहलाने लगी. मैं उसके बूब्स दबाने लगा. फिर, उसने मेरे लंड को मुह में लेकर चुसना शुरू किया और देखते ही देखते, मेरा लंड तन गया. मैंने उसे चारपाई पर पेट के बल लिटाया और उसके पेट के नीचे तकिया लगा दिया. जिससे उसकी गांड काफी ऊपर को उठ गयी. उसने अपनी टांगो को फैला लिया. यारो क्या नज़ारा था! मैं उसकी टांगो के बीच में बैठ गया और उसकी चूत के पानी से अपनी एक ऊँगली को गीला करके उसकी गांड में डाल दी. उसे दर्द हुआ, पर मैं नहीं रुका और ऊँगली अन्दर- बाहर करने लगा. फिर, मैंने दो उंगलिया डाल दी और फिर तीन. फिर, जब मुझे लगा कि अब उसकी गांड तैयार है, तो मैं उठा और उसके मुह के पास लंड लेजाकर उसके मुह में डाल दिया. मैंने उसे अपना लंड गीला करने को कहा. उसने अपने थूक से मेरा लंड पूरा गीला कर दिया. मैंने वापिस उसकी गांड के पास आकर बैठा और उसकी गांड पर लंड रखकर झटका मारा. लंड सिर्फ १.५ इंच तक अन्दर गया. उसकी चीख निकल गयी.
अब मुझे भी दर्द हुआ. मैं उसकी गर्दन पर किस करने लगा और फिर ३-४ धक्के और कस- कसकर मारे, तो मेरा पूरा लंड उसकी गांड में चला गया. उसकी चीख निकल गयी. पर उसकी चीख सुनने वाला कोई नहीं था. ख़ैर, जब वो कुछ नार्मल हुई. तो वो भी मेरा साथ देने लगी. मैं झटके मार रहा था. पर इस बार मेरा पानी जल्दी नहीं निकलने वाला था. मैं कुछ देर बीच में रुका, तो उसने मुझे बताया, कि मेरी दूसरी दूसरी मासी की चूत भी चाहिए. उसका नाम सुखी था. तो मैंने कहा – वो कैसे मिलेगी? वो तो बहुत शरीफ है. मासी बोली, जितनी बड़ी गश्ती वो है, और कोई भी नहीं. उसने कहा, कि मैं तुझे उसकी चूत दिलवा दूंगी. मैं खुश हो गया और जोश में आकर जोर – जोर से धक्के मारने लगा. चारपाई भी अलग- अलग तरह की आवाज़े निकाल रही थी. और मौसी भी… मासी कहने लगी पंजाबी में… “मार, मेरी गांड मार… फाड़ दे. मेरा पानी निकल गया. हाई मम्मी… मर गयी… मासी की बातो से मुझे जोश आ गया और मैंने अपनी स्पीड बड़ा दी और कुछ जोरदार धक्को के बाद, मासी की गांड में मैंने अपना पानी छोड़ दिया और निढाल होकर उसकी पीठ पर लेट गया.

भाभी के भाइयों ने मुझे जम कर चोदा



हेलो दोस्तों  | मेरा नाम रितिका है आज मैं आप लोगों को अपनी जिन्दगी की सच्ची घटना बताने जा रही हो |पहले मै आप लोगों को अपने बारे में बता दूं | मै दिल्ली से बिलोंग करती हूँ | और अभी एक बड़ी कम्पनी में जॉब कर रही हूँ | वैसे तो लड़कियां अपनी उम्र किसी को सही बताती नही हैं फिर भी मैं बता देती हूँ | मेरी उम्र अभी सिर्फ 23 साल है | और अभी मेरे ऊपर बस जवानी का खुमार छाया है | वैसे मै आप लोगों को बता दूँ कि मै थोड़ी हॉर्नी किस्म की लड़की हूँ | इसी लिए मेरे जवान होते ही मेरी सेक्स लाइफ शुरू हो गई थी | पहली बार मुझे मेरे बॉय फ्रंड ने एक होटल के कमरे में ले जाकर चोदा था | उस डिब उसने मेरी सील तोड़ कर मुझे पूरी तरीके से जवान बना दिया था | अब तो बस मुझे लंड ककी भूख रहती है | कि काब्व मुझे लंड मिले और मैं जन्न्स्त की सैर करूँ | अब थोडा अपने फिगर के बारे में भी तो बता दूँ | मेरे बूब्स ज्यादा बड़े नही है | एससी लिए मैंने इन्हे खूब दबाती और दबवाती हूँ | मेरी गांड तो लंड ले ले कर उठा गई है |
चलिए अब बात करते है | अपनी कहानी के बारे में | ये तब की बात है  | तब मै अभी कॉलेज लाइफ में थी | मेरे घर में एक शादी हुई | वो भी मेरे भाई की | मैं तो बहुत ही खुश थी | मैंने अच्छे से अपना मेक अप करवाया था अच्छे अच्छे कपड़े खरीदे थे | एक खूब महंगा लहंगा भी लिया था | जिसे मैं शादी के दिन पहनने वाली थी | शादी का वो दिन आ गया | मैं बारात में भी गई थी जिद करके | वहां हमने खूब नाचा | मै जब नाच रही थी तो कुछ लड़के मुझे घूर रहे थे | आखिर मै लग ही इतनी सुंदर रही थी | बाद में पता चला की वो मेरे भाभी के भाई हैं | बारात पहुंची | सब खाने पर जुट गए | वो लड़के  अभी भी मुझे ही देखे जा रहे थे | वैसे तो मैं भी एक ऐसे ही लड़के की तलाश में थी जो मुझे अपनी लंड की मस्त सवारी करा सके | वैसे वो चारो भी कम नही थे | एक से बढ़ कर एक हैण्डसम | सब के सब एक दम बॉडी बिल्डर लग रहे थे | अब तो मेरे मन में भी यही आ रहा था कि इनमे से एक का भी लंड लेने का मौका मिल जाता तो मज़ा आ जाता |खाना पीना खाने के बाद जयमाल का प्रोग्राम था | सब फोटो खिचवा रहे थे | उन लडको में से एक मेरे पास आया और बोला आप बहुत ही हॉट लग रही हो | मैंने कहा थैंक्स | और मुस्कुरा दी | वो वहां से चला गया | थोड़ी देर बाद शादी की रस्मे शुरू हो गई | कुछ लोग सो गए थे | तो बाकि लोग शादी देख रहे थे | मै अब बोर होने लगी थी | इसी लिए मैं बाहर आ गई | तो देखा कि वो लड़के एक कार के पास खड़े हो कर शराब पी रहे थे | उन लोगों ने मुझे देखा तो पुछा कि क्या हुआ | तो मैंने कहा मैं बोर हो रही हूँ | तो वो बोले चलिए हम आपको एन्जॉय करवाते हैं | आखिर आप हमारी मेहमान जो हैं | मैं मुस्कुराई | उन्होंने शराब पीने को कहा पहले तो मैंने मन कर दिया फिर ज्यादा जोर देने पर मैं मान गई | अब मुझे थोडा नशा हो रहा था | फिर वो सब बोले चलिए आप को घूमा कर लाते है | फिर हम गाड़ी में बैठे | और चल दिए |
अब हम कर में बैठ गए | दो लड़के मेर पास आ कर बैठ गए | और दो आगे | मैं बीच में बैठी थी | मुझे ये तो समझ आ गया था कि ये मुझे चोदने वाले हैं | लेकिन मैं भी चुदने के लिए तैयार थी | अभी कुछ देर चले ही थे की एक लड़के ने मेरे बूब्स पर हांथ रख दिया | तुरंत दुसरे ने मेरे लिप्स पे अपने लिप्स रख दिए | मैंने भी कोई विरोध नही किया तो वो और आगे बढे और एक लड़का मेरे बूब्स को चूसने लगा | मुझे भी अब मज़ा आने लगा था | फिर उन्होंने गाड़ी मोदी और एक बन्दले पर जा कर रोकी | हम सब अंदर गए | और फिर से शराब पीने लगे | कुछ देर बाद वो सब लड़के मुझे किस करने लगे मैं तो बस सातवी आसमान पर थी | उन्होने मेरे सारे कपड़े निकल दिए | और अब मै सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी | उस दिन मैंने ब्लैक कलर की ब्रा और पिंक कलर की पैंटी पहनी हुई थी | तभी उनमे से एक ने मेरी ब्रा पैंटी भी खींच कर निकल दिया  | मुझे नंगा देख कर उनके मुंह से सिसकिया निकलने लगी |
फिर क्या था सब ने अपने भी कपड़े निकलना शुरू कर दिया और फिर सब के सब नंगे हो गए | अब फिर से वो मेरे पास आये और मेरे शरीर पर कुत्तों के तरह जुट गए | फिर सबने मुझे नीचे बिठा दिया और अपना अपना लंड मेरे मुंह के सामने कर दिया | मै एक एक कर सबका लंड चूसने लगी | सब ने मुझे तकरीबन 15 मिनट तक अच्छे से चुसवाया और मुझे लेकर बेड रूम में गए | अबएक लड़के ने अपना लंड मेरी चूत पर रखा और एक दम जोर से झटका दिया | उसका पूरा लंड मेरी चूत में था | मुझे बहुत दर्द हो रहा था | आखिर उसका लंड भी तो बड़ा था | मेरी आंखों से आंसू आ गए |  फिर वो झटके देने लगा | मुझे भी मज़ा आ रहा था | मैं आःह्ह्ह… आह्ह्हह्ह.. कर के उनका साथ दे रही थी | वो मुझे एक दम रंडियों की तरह चोद रहा था | वो हटा तो उसके बाद बारी बारी से और तीनो ने मेरी चूत का मज़ा लिया |
और तकरीबन  1 घंटेतक मेरी जम कर चुदाई हुई | सब ने अपनी हवस पूरी तरीके से निकल ली थी | अब उन्होंने मुझे उल्टा किया और मेरी गांड में एक लड़का लंड डालने लगा |  मैं समझ गई  कि जो ये मरी गांड मरवाने की आदत है वो आज पूरी तरीके से छूट जाएगी | बस फिर क्या था चारों ने फिर से उसी कर्म में मेरी गांड भी मारी | मै चलने की हालत में नहीं थी इतना थक चुकी थी | तो भी इनकी हवस तो अभी बाकी थी | उमे से एक ने फिर से मेरी चूत में अपना लंड दे दिया |  और जोर जोर से धक्के देने लगा | कुछ देर तक वो मुझे ऐसे ही चोदता रहा | फिर वो मेर ऊपर से हटा | और अपना लंड मेरे मुंह में दे दिया | और मेरे मुंह में ही झड गया | मैं उसका सर रस पी गई | फिर सबने मेरे मुह में लंड देना शुरू कर दिया | फिर बारी बारी से अपना रस मेरे मुंह में छोड दिया |
सब के सब एकदम थक के चूर हो चुके थे | अब थोड़ी देर आराम से लेते रहे | फिर जल्दी से मैंने नहाया | और तैयार हो गई | वो मेरे लिए मेरे मेक अप का सामान ले आये थे | फिर मैंने एक एक कर के सबको किस किया | वो सब मेरे लिए एक एक गिफ्ट भी लेकर आये थे | मैं बहुत खुश हुई | और फिर हम गाड़ी में बैठ कर मैरिज हाल में वापस आ गए | किसी को ये खबर तक नही हुई कि मैंने अपने भैया की शादी में ही अपनी सुहागरात मना ली थी | उस रात मुझे ग्रुप में सेक्स करने का अनुभव हुआ | अब मैं ग्रुप में चुदाई बड़े ही मज्जे से करवाती हूँ |

मस्त चुदाई के चक्कर में मौत से हुई टक्कर



आजकल चूत और चुदाई बहुत ही आम बात हो गई है और इन्हें चोदना बिलकुल भी कठिन नहीं है क्यूंकि रंडियां हर चोराहे पे मिल ही जाती है | क्या नज़ारा होता है रांड वह हम यहाँ और उसके तीखे तीखे इशारे उफ्फ होश उदा देते है | वेसे तो हर इंसान जिंदगी में चोद लेता हा पर बात तब बनती है जब अगला आपसे खुश हो आपके लंड में इतना दम हो कि फटे हुए भोसड़े को और फाड़ दे | रंडी भी चुदने के बाद एक ही चीज़ बोले “वाह मेरे राजा एक बार और मेरी चूत बजा” | य तो हुई यहाँ वह की बाते अब आते है मैं मुद्दे पे और आज की कहानी का आरम्भ करते हैं |
मेरा नाम है जय कबाड़ी और में अपने काम के प्रति बहुत सजग रहता हूँ | चूँकि मेरी उम्र बस ४२ साल हा तो में एक दिन यहाँ वह अत जाता रहता हूँ काम के सिलसिले में | आज में आपके सामने इसलिए आया हूँ क्यूंकि मुझे चोदने का बड़ा शोक है | में लड़कियों की सुन्दरता नहीं देखता मुझे बस नीचे वाले दो छेदों से मतलब है | में जब छोटा था तो स्कूल में दोस्तों के साथ लडकियों के ड्रेस के ऊपर मुठ मरता था |
जब भी लड़कियां मेरा लंड देखती थीं वो चोंक जाती थीं क्यूंकि मेरा बड़ा ही इतना था | जी हाँ मेरा लंड मस्त ८ इंच लम्बा हा और तीन इंच मोटा | इतने बड़े लंड से चुदने में जो मज़ा है वो और कहीं नहीं | मैं तो बस इतना जनता हूँ कि अगर किसी को चोदो तो इतनी शिद्दत से चोदो की वो बस दूसरी बार तुम्हे ही याद करे | यही है जीवन की असली सच्चाई पर में तो साडी सीमाओं को तोड़ने के लिए इस दुनिया में आया हूँ और में हर चीज़ को मस्ती में करता हूँ | पर मेरी जिंदगी में भी एक बार वो पल आ गया जब मुझे एक साथी की ज़रूरत पड़ने लगी | आप लोग ये मत सोचिये की में यहाँ कोई सेक्स स्टोरी आह्ह्ह ऊह्ह करूँगा | में तो यहाँ पे आपको अपना सच्चा तजुर्बा बता रहा हूँ जो की मजेदार होने के साथ साथ बिलकुल ज्ञान से भरी है |
ये बात है जब मैंने कॉलेज पास कर लिया था और मेरे माँ बाप ने मेरे लिए लड़की देखना शुरू कर दिया था क्यूंकि में एक क्लर्क बन चूका था और तनख्वा भी पर्याप्त थी | पर कुछ सालो बाद मेरा मन नहीं लगा और और मैंने काम छोड़ दिया | सोचने की बात ये है की मादरचोद जबतक नौकरी थी तब तक शादी नही हुई पर जेसे ही नौकरी ख़तम शादी तय हो गई | मेरी गांड तो इसे फटी जेसे ज्वालामुखी| पर ये भी कम नहीं था क्यूंकि मेरी बीवी एक सरकारी नौकरी वाली थी | अब में एसा फस की क्या बताऊँ पर उसने सब कुछ आसान कर दिया और मैंने एक कबाड़ी का धंधा चालू कर दिया | इस धंदे ने मुझे इतना पैसा दिया की मैंने अपनी बीवी की नौकरी बंद करवा दी और जब भी घर जाता उसे छोडके आता| पर मेरे लंड में तब आग लग गयी जब मेरी साली घर रहने आई |
मैंने अपनोई जिंदगी में जो भी किआ या जितनी भी भी लड़कियों के साथ चुदाई की पर मेरी शादी के बाद में सुधर गया था और अपनी बीवी को ही ठोंकता था | पर साली के आने के बाद मेरा मन पलट रहा था| वो बड़ी हो गई थी और उसके दूध भी बढ़ गए थे | मैंने उसकी हलती सी कमर भी देखी थी जो बिलकुल चिकनी और गोरी थी | में बस उसको पकड़ने ही वाला था पर मैंने सोचा पटा के चूसने से दिक्कत नहीं होगी | में उससे खुद बातें करने लगा और उसको छूने लगा पर कई बार वो इसका विरोध करती| मुझे पता चल गया की ऐसे काम नहीं बनेगा पर मुझे उसका नंगा बदन देखना था | वो जिस कमरे में रुकी हुयी थी मैंने वहाँ उसके बाथरूम में कैमरा लगा दिया | अब जो मैंने देखा वो किसीने नहीं देखा | पर मैंने देखा क्या ? मैंने देखा कि वो अपने कपडे उतार रही थी | उसने जब अपनी सलवार खोली तो उसका नीला ब्रा मेरे सामने था और उसके बड़े तो नहीं हाँ पर स्तन मस्त थे | निप्पल बिलकुल गुलाबी और सफेद बदन मुझे दीवाना कर रहा था | फिर उसने अपनी चड्डी उतारी और उसकी झांतो से भरी चूत मेरे सामने थी और मेरा लंड उफान पे था | आज के पहले ऐसा कभी नही हुआ था की में चोदने से पहले झड गया पर मेरी साली ने ऐसा कर दिखाया था | मेरे लंड से बूँद बूँद करके मुठ निकल रहा था |
अब तो मैंने पूरा मन बना लिया था की इसे तो में चोद के ही रहूँगा भले ही कुछ भी करना क्यों न पड़े | मेरे दिमाग में कुछ आया और मैंने एक प्लान बनाया | मैंने अपनी बीवी को बहार भेज दिया यात्रा पर अपने माँ बाप के साथ और अब में और मेरी साली अकेले थे | कुछ दिन तक सब ठीक था पर एक दिन में घर जल्दी आया और मैंने उससे कहा की चलो बारिश हो रही हा भीगते हैं| वो मान गई और हम दोनों छत पे चले गए | अब हम दोनों खूब भीगे और नीचे आ गए |
मैंने कहा अंजू जाया तौलिया लेकर आना और वो चली गई | मैंने उतने समय में अपने टीवी पर ब्लू फिल्म लगा दी | जेसे ही वो आयी उसने देखा तो वो बोली ये क्या है इस बंद करो | मैंने जानबूझ के कहा की ये बंद नहीं हो रहा अब क्या करू | उसने टीवी बंद कर दी और वह से चली गई | मैंने भी सोचा पता नही क्या हुआ ओर में उसके पीछे गया और सीधे कामने में घुस गया| मैंने देखा वो नंगी थी और मैं उसे बस देखता रह गया | उसने जल्दी से अपने आप को ढाका और बहार चली गई| मैं रात में घर आया और माफ़ी मांगी तो उसने बोला कोई बात नहीं हो जाता है | ये सुनते ही मुझे अच्छा लगा और मैंने कहा सुनो मैं तुम्हे पसंद करता हूँ | वो बोली आप मेरी बहन के पति हो और ये अच्छा नहीं है और जोर से रोने लगी |
मैंने उसे गले लगे और कहा कुछ देखोगी तो उसने कहा क्या मैंने कैमरे की साडी रिकॉर्डिंग दिखाई और कहा में तुम्हे चोदना चाहता हूँ | वो और जोर से रोने लगी पर में धीरे धीरे उसके सारे कपडे उतारने लगा और वो रो रही थी | मैंने उसे नंगा करके उसके स्तन चूसे और खूब जोर जोर से उनपे काटने लगा | वो अब सिस्कारिया भर रही थी | उसने मुझसे कहा अब कर ही रहे हो तो थोडा आराम से कर लो न | में भी उत्साहित हो गया और उसकी बात मान ली | कभी में उसके पेट और नाभि पे चुम्मा लेता तो कभी उसकी गांड चाटने लगता | उम्म्मम्म्म्म जीजा जी मेरी चूत कुंवारी और प्यासी है उसको भी प्यार करो |
मैंने उसकी गुलाबी चूत पे अपनी जीभ राखी जो कि बिलकुल गीली थी और उसे चूसने लगा | जेसे ही मैंने थोड़ी देर तक ये किआ उसने सारा मुठ मेरे मुह पे गिरा दिया | अब वो ढीली पड गई थी पर मेरा लंड ताना हुआ था | चूँकि ये उसका पहली बार था तो मैंने उसे अपना लंड नहीं चुसाया | वो एक बार फिर से तैयार हो गयी थी और मेरा भी समय अ गया था | ऊह्ह्ह्ह ऊऊउफ़्फ़्फ़्फ़् अब मुझसे रहा नहीं जाता मेरी चूत में लंड डालो |
मैंने सोचा बड़ा मज़ा एगा क्यूंकि उसकी चूत कुंवारी है | मैंने अपना लंड उसे दिखाए बिना उसकी चूत पे रख के धीरे से अन्दर डाला | वो चिल्ला पड़ी ऊउईईइ माआआआआआआअ मर गई निकालो इसे मैं मर जाउंगी | मैं कहा सुनने वाला था | मैंने धीरे धीरे हिला के एक झटके में पूरा अन्दर किया और वो अब उम्म्मम्म्म्म करके रह गई | मुझे मज़ा आया क्यूंकि इतनी टाइट चूत बस मेरी बीवी की थी जिसे में चोद चूका हूँ | फच्च्च फच्च्च फच्च्च धप्प धप्प इन आवाजो से पूरा कमरा गूंजने लगा | और वो भी मज़े लेने लगी |
मैंने उससे कहा चलो अब घोड़ी बन जाओ अब में तुम्हरे गांड का छेद भी बड़ा कर दूँ | वो घोड़ी बनी और उसकी गांड भी बड़ी टाइट थी | पर मैंने एक ही धक्के में लंड उसके अन्दर पेल दिया | वो बेचारी चिल्लाती रह गई | मैंने उसे दिलभर के खूब चोदा | फिर मैंने अपना मुठ उसकी गांड में ही गिरा दिया और उसका पूरा पानी मेरे लंड पे लगा हुआ था | अब हम दोनों थक गए थे और एक दुसरे के ऊपर नंगे लेते हुए थे | वो मेरे बगल में आई और बोली मुझे आज पता चला दीदी इतनी खुश क्यों है |
मैंने बोला वो सब हटाओ चूत से खून क्यों नहीं आया | वो बोली मैंने अपनी ऊँगली से सील तोड़ दी थी | पर आपने तो मेरी गांड और चूत दोनों फाड़ दी | मैंने कहा मेरा लंड खड़ा है फिर से करना है मुझे तुम्हरी चुदाई| उसने मेरा लंड देखा और बोली क्या अभी में इससे चुद रही थी | बाप रे तभी तो मैं मरने वाली थी |
फिर उसने मुझे गले लगाया और प्यार से चूम के बोली ये लो मेरी चूत और जितना चोदना है चोद लो | पर मेरा पानी ज़रूर पीना | मैंने कहा ठीक है मेरी साली आज तू मेरी घरवाली |