Saturday, 5 August 2017

भरी हुई बहु के चुंचे चूस के चुदाई की – [भाग 1]

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दुलारी की शादी को अब तो 4 साल हो चुके हैं. लेकिन उसके मन की उलझन उसके मन में ही घर गई हैं. नपुंसक पति और चूत का सौकीन ससुर. उसकी किस्मत में यही लिखा था शायद. वो यही सोच के अपने 1 साल के मुन्ने को अपने चुंचो से स्तनपान करा रही थी के उसके ससुर कांतिलाल की आवाज आई, “अरे बहु हमारा छड़ी कहाँ रखा हुआ हैं? जरा बताना तो हमें मिल नहीं रहा हैं.” दुलारी जानती थी की कांतिलाल को मिल तो सब रहा हैं लेकिन वो आज भी दुलारी की चूत के लिए प्लानिंग किये होंगा इसलिए बुला रहा हैं अंदर. उसने मुन्ने के मुहं से अपनी चुंची निकाली और स्तन को ब्लाउज के आवरण में ढँक के वो कमरे में गई. उसे देख के कांतिलाल ने उसे अपनी तरफ आने का इशारा किया. उसके पास जाते ही ससुर ने अपनी इस जवान और भरी हुई बहु को अपनी तरफ खिंचा. दुलारी की आँखे सवालों से भरी हुई थी और तभी कांतिलाल ने उसके कान में कहा, “आज कंडोम ले के आयेंगे हम. तुम अपनी ससुर को नींद की गोली शाम के खाने में दे देना…! और तुम्हारें लिए गर्भनिरोधक गोली भी ले आयेंगे की फिर से वो 9 महीने की सजा ना उठानी पड़ें.”

कांतिलाल की वासना से भरी हुई निगाहें

दुलारी को यह पता ही था. कांतिलाल ने अपनी गांड के आगे से छड़ी निकाली और वो बाजार की और चल दिया. जवानी और कामरस से भरी हुई दुलारी जब पहली बार इस घर में आई थी तो कांतिलाल ने पुरे समाज के सामने उसे बिटिया बना के रखने का दावा किया था. लेकिन उसका वो दावा खोखला ही था क्यूंकि पहले दिन से ही उसकी नजरें दुलारी के प्रति वासना से जो भरी हुई थी. अपने बेटे की असलियत भला उस से थोड़ी छिपी थी. वो जानता था की बिरजू एक नपुंशक हैं और फिर भी उसने जवानी के भार से लदी हुई यह सेक्सी जवान लड़की को उसके गले में लटकाया था. शायद यही कांतिलाल की प्लानिंग थी अपनी सेक्स से भरी हुई नियत को बर लाने की. उसकी पत्नी सावित्री अब बूढी हो चुकी थी और उसकी चूत से मासिक के साथ साथ अब सेक्स भी बंध हो चूका था. इसलिए वो ना उसे चोदने देती थी ना ही ऐसा कुछ प्रबंध करती थी जिस से कांतिलाल का बुढा लंड शांति पायें. उसका रास्ता भी कान्तिलाल ने निकाला था. बाजार से वो नींद की गोली ले आते थे और पत्नी को शाम के खाने में दे देते थे. वो सो जाती थी और बिरजू के रूम में ससुर और बहु की कामक्रीड़ा होती थी.
वैसे बिरजू भी इस से अनजान नहीं था. लेकिन अपनी भरी हुई मज़बूरी की वजह से वो अपने बाप को अपनी बीवी की चूत मारने देता था. दुलारी की गर्मी से भरी हुई चूत के लिए उसका ढीला और छोटा लंड जो तैयार नहीं था. कभी कभी तो वो अपने सामने ही अपने बाप को अपनी बीवी की चूत मारते देखता था. और उसे यह भी पता था की यह मुन्ने का बाप तो उसका असली बाप यानी की कांतिलाल था. और भले मुन्ने के बर्थ के दाखिले में बिरजू उसका पिता था, लेकिन असलियत में तो बिरजू और उसका बिटवा भाई भाई ही थे. शाम के ढलने से पहले कांतिलाल बाजार से आये और उन्होंने एक पुड़ी बहु दुलारी के हाथ में दे दी. दोनों ने इधर उधर देख के सुनिश्चित किया की कोई देख नहीं रहा हैं. दरअसल यह वही नींद की दवाई थी जो सावित्री को सुलाने के लिए आई थी. दुलारी ने पुड़ी को अपनी चुंची के ऊपर रख दिया.

ससुर गए दुलारी की चूत लेने के लिए

शाम के खाने में जो बाउल में सब्जी भरी हुई थी उसी में दुलारी ने नींद की दवाई मिला दी थी. चम्मच से मिक्स करने पे पता भी नहीं चलता था की उसमे कोई दवाई मिलाई हैं सावित्री ने नित्यकर्म के मुताबिक़ शाम को 7:30 बजे खाना खाया और 9:30 बजे के पहले पहले तो उसे नींद भी आ गई. कांतिलाल ने हुक्के की गुडगुड को धीमा किया और जानबूझ के सावित्री को एक दो आवाज दी. सामान्यत: एक आवाज में उठने वाली सावित्री हिली भी नहीं. उसकी आँखे नींद से भरी हुई थी उस दवाई की असर के चलते. कांतिलाल ने अपने हुक्के को सही तरह रखा और वो धोती को ठीक तरह बाँध के बहार आया. दुलारी के कक्ष के उपर हलके से नोक करते ही वो उठ के बहार आई. रात को सोने के लिए उसने अभी एक खुला गाउन पहना हुआ था जिसके अंदर शायद कोई ब्रा नहीं थी तभी तो उसके सेक्सी चुंचे उछलने की माफिक हिल रहे थे. बिरजू ने करवट बदल के जैसे ही अपने बाप को कक्ष के बहार देखा वो उठ खड़ा हुआ. उसने अपनी पतलून सही की और वो कक्ष के बहार आ गया. वो अक्सर पिता और पत्नी को पूरा एकांत दे देता था ताकि वो लोग खुल के चुदाई कर सकें. कभी कभी तो वो खेत में ही जाके सो जाता था. और वासना से भरी हुई रात का ससुर और बहु पूर्ण मजा लेते थे. दुलारी को कांतिलाल से चुदने में अब कोई शर्म नहीं आती थी; हाँ पहले पहले वो जरुर शर्मा जाती थी.
कांतिलाल के कक्ष में आते ही दुलारी ने कमाड को बंध किया और वो जैसे ही मुड़ी कांतिलाल ने उसे अपनी बाहों में भर लिया. कांतिलाल के गर्म गर्म हाथ दुलारी के सिने और गरदन को सहला रहे थे और उसके होंठ दुलारी के मुहं, गाल, नाक और कान के ऊपर फिर रहे थे. बूढ़े के दिमाग में जैसे की इंग्लिश फिल्मों का भुत आया हुआ था. कांतिलाल ने अब अपना हाथ गाउन के अंदर सरकाते हुए दुलारी की दूध से भरी हुई चुंचियो के उपर रख दिया. दुलारी ने हलकी सी सिसकी ली और हाथ को चुंची के उपर दबा दिया. दुलारी की चुंची से दूध निकल के ससुर कांतिलाल के हाथ पे लगा. कांतिलाल ने हाथ गाउन से निकाल के दूध को चाट लिया. दुलारी का हाथ पकड़ के वो उसे बिस्तर की तरफ ले गया………क्रमश:


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