Saturday, 5 August 2017

चुंचे चूसाने के सौखीन नवाब साहब, बायसेक्स्युअल स्टोरी – [भाग 2]

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नवाब साहब के चुंचे चूस के उनकी गांड मारी गई

मेरे दिमाग ने काम करना जैसे की बंध कर दिया था. नवाब साहब अपने चुंचे अरबी गुलाम से चूसा रहा थे और उनके लंड के उपर मिसरी औरत का मुहं लगा था. हुस्ना बानो नाम की यह मिसरी दासी अपने चुंचे दबाते हुए नवाब साहब का लंड चूस रही थी. नवाब साहब के लंड में अब जैसे की थोड़ी जान सी आ रही थी. उनका 5 इंच का लंड अब एकदम से खड़ा लग रहा था. पता नहीं यह लंड कैसे खड़ा हुआ था, चुंचे चुसे जाने पे या लंड चुसे जाने पे. खेर खड़ा हो गया था वो अच्छी बात थी. अरबी गुलाम के लंड के ऊपर नवाब साहब ने अपने हाथ को रखा और वो उसे हिलाने लगे. जैसे की सांप को बर्फ में जमा दिया गया हो वैसे वो लंड टाईट हो गया. नवाब साहब ने अपने लंड के ऊपर से हुस्ना बानो को हटा दिया. उन्होंने अब अरबी लौंडे को अपने चुंचे से भी हटा दिया. नवाब साहब के मर्दाना स्तन के ऊपर मैंने उस गुलाम के मुहं से पड़े हुए लाल लाल निशान साफ़ देख सकता था. नवाब साहब ने अब उसे लौंडे को निचे बैठने का इशारा किया. उसका 8-9 इंच लम्बा लौड़ा किसी भी चूत को फाड़ने की क्षमता के साथ आसमान की तरफ ताना हुआ था. मुझे लगा की नवाब साहब शायद उस मिसरी लौंडी को उस लंड से सजा देंगे, और मैं मन ही मन में उस मिसरी औरत की चूत की केफियत सोच के घबरा रहा था…!
लेकिन यह क्या, नवाब साहब खुद उस लंड को पकड़ के उसके ऊपर बैठने लगे. अरे बाप रे नवाब साहब की गांड में वो लंड कैसे जा सकता था, गांड थोड़ी रबर की बनी हैं…? लेकिन नवाब साहब सच में उस नाग को अपनी गांड में घुसा बैठे. अरबी गुलाम ने नवाब साहब के चुंचे पकडे और जैसे वो किसी औरत के चुंचे मसल रहा हो वैसे मसलने लगा. हुस्ना बानो ने एक जाम बनाया और नवाब साहब के मुहं में डालने लगी. नवाब साहब आह आह कर के अपनी गांड में जा रहे इस फ़ोलादी लंड के झटके लेने लगे. अब हुस्ना बानू निचे बैठे के वापस नवाब साहब के लंड को मुहं में लेने लगी. उसने दो मिनिट लंड को चूसा और फिर आधे भरे हुए जाम से लंड को भिगोया. शराब के डूबे लंड को अब वो वापस से चूसने लगी. क्या नजारा था वो, हजारों एकड़ जमीन के मालिक नवाब इद्रीस की गांड में एक अदना अरबी गुलाम का लौड़ा अंदर बहार हो रहा था. मेरा हाथ घडी घडी तलवार के ऊपर जा रहा था लेकिन मज़बूरी थी इसलिए वापस भी आ जाता था.

नवाब साहब का लंड काम भी करता था

तभी हुस्ना बानो उठी और अपनी चूत में ऊँगली डाल के हस्तमैथुन करने लगी. नवाब साहब ने अपने 5 इंचे लंड को उठाया और हुस्ना बानू को बुलाया. हुस्ना बानो ने नवाब साहब के 5 इंच के लंड को पकड़ा और अपनी चूत में घुसाने की नाकाम कोशिस करने लगी. 2 मिनिट के बाद लंड अंदर गया. अब तीनो सेक्स के असीम नशे में एक दुसरे को झटके दे रहे थे. सब से निचे अरबी लौंडा था जो नवाब साहब की गांड मार रहा था और उनके चुंचे मसल रहा था. बिच में नवाब साहब थे जो पीछे गांड में लंड लिए हुए थे और आगे वो हुस्ना बानो की चूत में लंड डाल रहे थे. दोनों का वजन इस अरबी गुलाम के ऊपर आ रहा था लेकिन वो तो वही मस्ती से नवाब साहब की गांड में दे रहा था. शायद इसी काम की वजह से उसे बादाम पिस्ते और दूध की खुराक दी जाती थी. अरे खुद नवाब साहब जब उसके खाने की फ़िक्र करते थे तभी हम लोगो को समझ लेना चाहिए था. हुस्ना बानो की चूत से नवाब साहब का छोटा लंड बारबार बहार आ जाता था लेकिन फिर भो वो लगे हुए थे. नवाब साहब ने अब अपने हाथ हुस्ना बानू के चुंचो पे रखे और उसे दबाने लगे. हुस्ना बानू ने भी अब उछल उछल के लंड को और अंदर तक ले लेने की कोशिस की.
तभी उस अरबी गुलाम के मुहं से थके होने की आवाज आई. नवाब साहब ने हुस्ना बानू की उपर उठाया और खड़े हो गए. उन्होंने अब हुस्ना बानू को निचे लिटाया और उसकी चूत में लंड डाल के उलटे हो गए. पीछे से अरबी गुलाम आया और नवाब साहब की गांड में अपना लंड डालने लगा. पहले जो काम बैठे बैठे हो रहा था अब वो लेटे लेटे हो रहा था. सिर्फ चुंचे आराम कर रहे थे अभी. नवाब साहब अब आह आह कीआवाज निकाल रहे थे शायद अरबी लंड अब उनकी गांड बहुत जोर से खोद रहा था. तभी उस अरबी गुलाम ने जोर जोर से झटके मारने चालू किये. हुस्ना बानो निचे लेटे हुए नवाब साहब के चुंचे चूसने लगी. नवाब साहब ने अपनी गांड को दोनों हाथों से पकड़ के फैला दिया. अरबी लंड जब उनकी गांड से बहार निकाला गया तो उसके ऊपर दूध की ऊपर जैसे मलाई की परत होती हैं वैसी गाढ़े वीर्य की परत लगी हुई थी. अरबी गुलाम वही निढाल हो के लेट गया.
इधर नवाब साहब अब हुस्ना बानो के चुंचे चूसते हुए उसकी जम के चुदाई करने लगे. उनकी गांड में वीर्य निकलते ही जैसे की उनके अंदर नया जोश आया था और वो जोश वो अब चूत की चुदाई में दिखा रहे थे. आह आह करते हुए नवाब साहब तभी लेट गए हुस्ना बानो के ऊपर. शायद यह नवाब साहब की सिकश्त थी चूत के अंदर. मैंने देखा की अब यहाँ ठहरना मुनासिब नहीं हैं क्यूंकि तीनो के संभोग की प्यास अब बूझ चुकी थी और अगर किसी ने मुझे यहाँ देख लिया तो मेरा सर कल हाथी के पाँव के निचे हो सकता हैं.
यह थी हमारे नवाब इद्रीस के चुंचे की दास्ताँ. वैसे तो वो सब काम में ठीक थे लेकिन जैसे मुझे नवाब की यह हलकट और नाकारा बात पता चली उनकी इज्जत मेरी निगाहों में कम हो गई. यह तो मज़बूरी हैं इसलिए वरना ऐसे दोहरे संभोग व्यक्तित्व वाले इंसान के आगे काम करना ठीक नहीं हैं. आगे हो तो लंड पे खतरा पीछे घुमो तो गांड में संकट……


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