फिर मैंने भाभी के आँसू साफ किए और उनको समझाया कि कोई बात नहीं आप जो
कर रही हैं कीजिये में आपसे कुछ नहीं कहूंगी.. लेकिन शायद उनका मूड ऑफ हो
गया था और वो वापस मेक्सी पहनकर सोने चली गयी। तभी मेरे दिमाग़ में एक
आईडिया आया और मैंने अपना लेपटॉप उठाया और भाभी के पास जाकर बैठ गयी। फिर
भाभी से मैंने सॉरी कहा तो उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं फिर मैंने उनसे
पूछा कि आप कौन सी साईट देख रही थी? लेकिन वो कुछ नहीं बोली। तो मैंने कहा
कि प्लीज बताईए ना.. यह आपकी ननद नहीं आपकी एक फ्रेंड पूछ रही है।
वो बैठ गयी और उन्होंने साईट एंटर की.. उस पर ऑनलाईन वीडियो चल रहा था.. जिसमे एक लड़का एक लड़की को बड़े प्यार से चोद रहा था। फिर मैंने भाभी से कहा कि भाभी जो आप करती हैं वो ग़लत नहीं है और आपको यह अकेले करने की कोई जरूरत नहीं है। तभी वो बोली कि क्या मतलब? फिर मैंने कहा कि जब आप यह सब कर रही थी तो में भी लेटे लेटे अपनी चूत में उंगली कर रही थी और इतना सुनते ही हम दोनों की हंसी छूट पड़ी। फिर उन्होंने कहा कि ओह तो अब तुम बड़ी हो गयी हो। मैंने कहा कि भाभी एक बात बोलूं.. अगर आप बुरा नहीं मनो तो। फिर उन्होंने कहा कि बोलो। मैंने कहा कि भाभी में आपको दोबारा बिना कपड़ो के अपनी चूत में उंगली करते हुए देखना चाहती हूँ।
तभी वो बोली कि चल बदमाश.. फिर मैंने कहा कि नहीं भाभी मेरा भी मन करता है प्लीज़। तो भाभी बोली कि ठीक है.. लेकिन एक बात बताओ क्या तुम्हें लेस्बियन पसंद है? तो में बोली बाद में बताऊँगी और भाभी धीरे से मुस्कुराते हुई अपनी मेक्सी उतारने लगी.. उन्होंने नीचे कुछ नहीं पहन रखा था और शायद चूत भी आज ही शेव की होगी। फिर वो धीरे धीरे से अपने बूब्स दबाने लगी और अपने होटों को अपने ही दांतो से चबाने लगी। धीरे धीरे मुझे भी नशा सा छाने लगा और मेरी भी साँसे तेज़ होने लगी। भाभी अपनी आँखे बंद करके अपनी चूत रगड़ने लगी और फिर से आआअहह ओओओह उफ़फऊहह की आवाज़ें निकालने लगी। मैंने धीरे से अपना हाथ भाभी के बूब्स पर रखा तो भाभी कहने लगी कि प्लीज़ मेघा ये सही नहीं होगा.. मैंने कहा भाभी आज तुम्हे भी इसकी जरुरत है और मुझे भी। मैं तुम्हे एक लड़के जैसा सुख तो नहीं दे पाऊँगी पर एक अहसास ज़रूर दे सकती हूँ.. प्लीज़ रोकना मत।
भाभी बोली ऊफ़फ्फ़ मेघा तुम कितनी अच्छी हो और अपनी आँखे खोलकर मेरे होटों पर एक जोरदार किस करने लगी। उनकी इस अदा से मेरे तो पूरे शरीर मैं बिजली सी दौड़ गई। मैंने कहा ओह भाभी और में अपने दोनों हाथों से उनके बूब्स पकड़कर उनको दोबारा किस करने लग गई। तभी भाभी बोली कि ज़रा देखूं तो मेरी प्यारी दोस्त का बदन कैसा है और सबसे पहले वो मेरे ऊपर की लूज़ टी-शर्ट उतारती है और कहती हैं वाह मेघा तुम्हारे बूब्स देखकर तो मुझे अपने 18 साल वाले बूब्स की याद आ गयी। छोटे छोटे संतरे की तरह और मेरे बूब्स को अपने दाँतों से दबाने लगी। भाभी कहने लगी कि तुम्हारे ये छोटे बूब्स किसी छोटी स्ट्रॉबेरी की तरह है.. क्या इनमे दूध है? मैंने कहा भाभी खुद ही पी कर देख लो.. वो जैसे ही मेरे बूब्स को चूसने लगती है.. मेरे मुँह से सिसकियां निकलने लगी। भाभी मैं मर जाऊँगी ज़रा धीरे आआआःह उफफफ्फ़ तभी पता नहीं मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे बूब्स के अंदर से कोई धागा बाहर खींचा जा रहा हो। मुझे दर्द भी हो रहा था और मज़ा भी आ रहा था। मेरे मुहं से एक सिसकी निकल पड़ी.. तभी भाभी मेरे दूसरे बूब्स को भी चूसने लगी.. उस पल को मैं बयां नहीं कर सकती। लगभग 20 मिनट मेरा दूध पीने के बाद मेरे चूचे लटक गए थे।
मेरी समझ मैं नहीं आ रहा था कि क्या करूं। मैं तो बस भाभी का मुहं अपने चूचों मैं दबाए जा रही थी। तभी मैंने भाभी का सर अपने चूचों से अलग किया और उनके होटों को चूसने लगी। भाभी भी अपना पूरा रेस्पॉन्स दे रही थी। करीब 5 मिनट किस करने के बाद मैंने उनके बूब्स को हाथ मैं लिया और धीरे धीरे उन्हे मसलने लगी.. उनके बूब्स मुझसे काफ़ी बड़े थे। मेरे बूब्स का साइज़ 28 था.. मगर उनका तो 34 था और वो इतने लाल और कठोरे जैसे हो गये थे कि मैं बता नहीं सकती। मैंने एक हाथ से उनके बूब्स को दबाना शुरू किया और दूसरे को चूसने लगी। भाभी तो जैसे बिना जल की मछली की तरह तड़पने लगी और मेरे सर को अपने बूब्स मैं दबाने लगी। करीब दस मिनिट बाद उन्होंने मेरी स्कर्ट को निकाल दिया। मैंने देखा की मेरे पेंटी पूरी गीली हो चुकी थी और भाभी की चूत से भी पानी टपकने लगा था।
मैंने अपना हाथ भाभी की चूत के नीचे लगाया और उनका पानी चाटने लगी। भाभी तो मानो मर ही जायेगी.. फिर उन्होंने मुझसे अपनी पेंटी उतारने को कहा। मेरी चूत देखकर वो बोली कि वाह्ह अभी तक वर्जिन हो। मैंने कहा हाँ और आप? तो उन्होंने कहा हाँ तुम्हारे भैया तो चले गये थे। मैंने भाभी का सर धीरे से पकड़कर अपनी चूत पर लाकर सटा दिया। वो उसे ऐसे चाटने लगी कि जैसे कोई बरसो से प्यासे को पानी की 1 बूँद मिल गयी हो और मेरी साँसे फिर से तेज़ होने लगी थी और दिल इतनी जोरो से धड़क रहा था कि मानो अभी बाहर आ जाएगा। कुछ देर बाद हम दोनों 69 की पोज़िशन मैं आ गये। भाभी की आवाज़ काफ़ी तेज़ हो गयी थी। इतने मैं भाभी ने अपने पैरों से मेरा सर जकड़ लिया और एक तेज धार उनकी चूत से निकलकर मेरे पूरे मुँह पर फैल गयी और उनके मुँह से संतुष्टी की एक आवाज़ सी निकल गयी।
अब बारी मेरी थी। भाभी मेरी चूत मैं अपनी जीभ डाल कर अंदर बाहर कर रही थी और अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था। भाभी प्लीज़ कुछ करो और चोदो भाभी और भाभी और अंदर भाभी और प्लीज़ और अंदर डालो आआहह और मैं भी झड़ गयी। भाभी का पूरा मुँह मेरे पानी से नहा गया। कुछ देर हम एक दूसरे से लिपटे हुए ऐसे ही पड़े रहे। मैंने भाभी को कहा भाभी अगर लड़की से इतना मज़ा आता है तो लड़के कितना मज़ा देते होंगे। भाभी बोली तू चिंता मत कर मेघा 2 साल बाद तुझे ये मज़ा ज़रूर मिलेगा.. तो में बोली कि भाभी मैं चाहती हूँ आप भी इसका मज़ा ले सको।
यह सब करते करते सुबह के 4.30 बज गये थे। हम दोनों की हालत बहुत खराब थी और उस दिन के बाद हमारे बीच रोज़ रात को यही सब चलता रहा।
वो बैठ गयी और उन्होंने साईट एंटर की.. उस पर ऑनलाईन वीडियो चल रहा था.. जिसमे एक लड़का एक लड़की को बड़े प्यार से चोद रहा था। फिर मैंने भाभी से कहा कि भाभी जो आप करती हैं वो ग़लत नहीं है और आपको यह अकेले करने की कोई जरूरत नहीं है। तभी वो बोली कि क्या मतलब? फिर मैंने कहा कि जब आप यह सब कर रही थी तो में भी लेटे लेटे अपनी चूत में उंगली कर रही थी और इतना सुनते ही हम दोनों की हंसी छूट पड़ी। फिर उन्होंने कहा कि ओह तो अब तुम बड़ी हो गयी हो। मैंने कहा कि भाभी एक बात बोलूं.. अगर आप बुरा नहीं मनो तो। फिर उन्होंने कहा कि बोलो। मैंने कहा कि भाभी में आपको दोबारा बिना कपड़ो के अपनी चूत में उंगली करते हुए देखना चाहती हूँ।
तभी वो बोली कि चल बदमाश.. फिर मैंने कहा कि नहीं भाभी मेरा भी मन करता है प्लीज़। तो भाभी बोली कि ठीक है.. लेकिन एक बात बताओ क्या तुम्हें लेस्बियन पसंद है? तो में बोली बाद में बताऊँगी और भाभी धीरे से मुस्कुराते हुई अपनी मेक्सी उतारने लगी.. उन्होंने नीचे कुछ नहीं पहन रखा था और शायद चूत भी आज ही शेव की होगी। फिर वो धीरे धीरे से अपने बूब्स दबाने लगी और अपने होटों को अपने ही दांतो से चबाने लगी। धीरे धीरे मुझे भी नशा सा छाने लगा और मेरी भी साँसे तेज़ होने लगी। भाभी अपनी आँखे बंद करके अपनी चूत रगड़ने लगी और फिर से आआअहह ओओओह उफ़फऊहह की आवाज़ें निकालने लगी। मैंने धीरे से अपना हाथ भाभी के बूब्स पर रखा तो भाभी कहने लगी कि प्लीज़ मेघा ये सही नहीं होगा.. मैंने कहा भाभी आज तुम्हे भी इसकी जरुरत है और मुझे भी। मैं तुम्हे एक लड़के जैसा सुख तो नहीं दे पाऊँगी पर एक अहसास ज़रूर दे सकती हूँ.. प्लीज़ रोकना मत।
भाभी बोली ऊफ़फ्फ़ मेघा तुम कितनी अच्छी हो और अपनी आँखे खोलकर मेरे होटों पर एक जोरदार किस करने लगी। उनकी इस अदा से मेरे तो पूरे शरीर मैं बिजली सी दौड़ गई। मैंने कहा ओह भाभी और में अपने दोनों हाथों से उनके बूब्स पकड़कर उनको दोबारा किस करने लग गई। तभी भाभी बोली कि ज़रा देखूं तो मेरी प्यारी दोस्त का बदन कैसा है और सबसे पहले वो मेरे ऊपर की लूज़ टी-शर्ट उतारती है और कहती हैं वाह मेघा तुम्हारे बूब्स देखकर तो मुझे अपने 18 साल वाले बूब्स की याद आ गयी। छोटे छोटे संतरे की तरह और मेरे बूब्स को अपने दाँतों से दबाने लगी। भाभी कहने लगी कि तुम्हारे ये छोटे बूब्स किसी छोटी स्ट्रॉबेरी की तरह है.. क्या इनमे दूध है? मैंने कहा भाभी खुद ही पी कर देख लो.. वो जैसे ही मेरे बूब्स को चूसने लगती है.. मेरे मुँह से सिसकियां निकलने लगी। भाभी मैं मर जाऊँगी ज़रा धीरे आआआःह उफफफ्फ़ तभी पता नहीं मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे बूब्स के अंदर से कोई धागा बाहर खींचा जा रहा हो। मुझे दर्द भी हो रहा था और मज़ा भी आ रहा था। मेरे मुहं से एक सिसकी निकल पड़ी.. तभी भाभी मेरे दूसरे बूब्स को भी चूसने लगी.. उस पल को मैं बयां नहीं कर सकती। लगभग 20 मिनट मेरा दूध पीने के बाद मेरे चूचे लटक गए थे।
मेरी समझ मैं नहीं आ रहा था कि क्या करूं। मैं तो बस भाभी का मुहं अपने चूचों मैं दबाए जा रही थी। तभी मैंने भाभी का सर अपने चूचों से अलग किया और उनके होटों को चूसने लगी। भाभी भी अपना पूरा रेस्पॉन्स दे रही थी। करीब 5 मिनट किस करने के बाद मैंने उनके बूब्स को हाथ मैं लिया और धीरे धीरे उन्हे मसलने लगी.. उनके बूब्स मुझसे काफ़ी बड़े थे। मेरे बूब्स का साइज़ 28 था.. मगर उनका तो 34 था और वो इतने लाल और कठोरे जैसे हो गये थे कि मैं बता नहीं सकती। मैंने एक हाथ से उनके बूब्स को दबाना शुरू किया और दूसरे को चूसने लगी। भाभी तो जैसे बिना जल की मछली की तरह तड़पने लगी और मेरे सर को अपने बूब्स मैं दबाने लगी। करीब दस मिनिट बाद उन्होंने मेरी स्कर्ट को निकाल दिया। मैंने देखा की मेरे पेंटी पूरी गीली हो चुकी थी और भाभी की चूत से भी पानी टपकने लगा था।
मैंने अपना हाथ भाभी की चूत के नीचे लगाया और उनका पानी चाटने लगी। भाभी तो मानो मर ही जायेगी.. फिर उन्होंने मुझसे अपनी पेंटी उतारने को कहा। मेरी चूत देखकर वो बोली कि वाह्ह अभी तक वर्जिन हो। मैंने कहा हाँ और आप? तो उन्होंने कहा हाँ तुम्हारे भैया तो चले गये थे। मैंने भाभी का सर धीरे से पकड़कर अपनी चूत पर लाकर सटा दिया। वो उसे ऐसे चाटने लगी कि जैसे कोई बरसो से प्यासे को पानी की 1 बूँद मिल गयी हो और मेरी साँसे फिर से तेज़ होने लगी थी और दिल इतनी जोरो से धड़क रहा था कि मानो अभी बाहर आ जाएगा। कुछ देर बाद हम दोनों 69 की पोज़िशन मैं आ गये। भाभी की आवाज़ काफ़ी तेज़ हो गयी थी। इतने मैं भाभी ने अपने पैरों से मेरा सर जकड़ लिया और एक तेज धार उनकी चूत से निकलकर मेरे पूरे मुँह पर फैल गयी और उनके मुँह से संतुष्टी की एक आवाज़ सी निकल गयी।
अब बारी मेरी थी। भाभी मेरी चूत मैं अपनी जीभ डाल कर अंदर बाहर कर रही थी और अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था। भाभी प्लीज़ कुछ करो और चोदो भाभी और भाभी और अंदर भाभी और प्लीज़ और अंदर डालो आआहह और मैं भी झड़ गयी। भाभी का पूरा मुँह मेरे पानी से नहा गया। कुछ देर हम एक दूसरे से लिपटे हुए ऐसे ही पड़े रहे। मैंने भाभी को कहा भाभी अगर लड़की से इतना मज़ा आता है तो लड़के कितना मज़ा देते होंगे। भाभी बोली तू चिंता मत कर मेघा 2 साल बाद तुझे ये मज़ा ज़रूर मिलेगा.. तो में बोली कि भाभी मैं चाहती हूँ आप भी इसका मज़ा ले सको।
यह सब करते करते सुबह के 4.30 बज गये थे। हम दोनों की हालत बहुत खराब थी और उस दिन के बाद हमारे बीच रोज़ रात को यही सब चलता रहा।

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