Tuesday, 15 August 2017

रसीली भौजी भाग १

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कुछ दिनों पहले मेरे सामने वाले घर में नये किरायेदार लोग रहने को आए, वो सिर्फ़ पति पत्नी ही थे, पति काम के मैंने कहा कि भाभी मुझे भी रोटियाँ बनाना सिखा दो और उसके पास जाकर खड़ा हो गया। अब मेरी आँखे उसके मस्त बूब्स पर लगी हुई थी और कारण बाहर रहते थे। अब में भी अकेला और वो भी अकेली तो हम दोनों में बातचीत होती रहती थी। फिर एक दिन सेक्सी भाभी ने मुझसे पूछ लिया कि आजकल खाना कैसे बना रहे हो? तो मैंने कहा कि होटल में जाकर खाता हूँ। फिर वो बोली कि आजकल बाहर का खाना काफ़ी पसंद आ रहा है, क्या बात है? तो में बोला कि क्या करें? घर में कोई बनाने वाली नहीं है तो? तो भाभी बोली कि आज रात रोटी सब्जी में भेज दूँगी। फिर मैंने कहा कि नहीं अगर ऐसा है तो घर पर आकर रोटियाँ बना देना और सब्जी तो कच्ची पक्की में भी बना सकता हूँ। फिर भाभी बोली कि नहीं में आकर बना जाऊंगी।
अब में खुश हो गया था कि इसी बहाने मुझे उसके पास रहने का मौका मिलेगा और अब मैंने बाहर से कुछ सब्जी मँगवा ली थी। फिर उस रात 9 बजे भाभी अपना काम ख़त्म करके मेरे लिए रोटी बनाने आ गई। फिर मैंने उसको आटा दे दिया और अंदर वाले कमरे में आकर टी.वी देखने लगा, लेकिन अब मेरा ध्यान भाभी की तरफ ही था। अब मेरा मन कर रहा था कि भाभी बोले कि इधर आ जाओ और में जल्दी से उसको चोद डालूं, लेकिन डर लगता था। फिर मैंने कुछ देर टी.वी पर इधर उधर देखने के बाद फैशन टी.वी चला दिया, तो उस टाईम शो चल रहा था तो में अंजान बनते हुए उसे देखने लगा और सोचने लगा कि काश भाभी वही से मुझे देखते हुए ये सब देख ले।
अब में भी चोरी से भाभी को देख रहा था कि वो देखती है या नहीं। फिर थोड़ी देर के बाद भाभी हाथ में रोटी लिए किचन से झाँकी तो उसकी नजर टी.वी पर पड़ी और वो काफ़ी देर तक कभी टी.वी तो कभी मुझे देखती रही और में अंजान बना बैठा रहा। फिर जब भाभी फिर से किचन में चली गई तो मैंने टी.वी चालू छोड़कर उठा और किचन में चला गया। फिर मैंने कहा कि भाभी मुझे भी रोटियाँ बनाना सिखा दो और उसके पास जाकर खड़ा हो गया। अब मेरी आँखे उसके मस्त बूब्स पर लगी हुई थी और उसके बड़े-बड़े बूब्स मस्ती से हिल रहे थे। फिर मैंने कहा कि अरे भाभी आपको तो पसीना आ रहा है। अब मेरी नजर उसके बूब्स पर ही थी, तो उसने एकदम से अपनी चुन्नी ठीक कर ली और बोली कि शैतान कही का। फिर मेरी हिम्मत बढ़ गई और में थोड़ा सा उसके और पास चला गया और बोला कि भाभी रोटी बनाना सीखाओ ना और आटे को छेड़ने लगा, तो इसी छेड़छाड़ में मेरा हाथ उसके बूब्स पर लग गया तो मैंने एकदम से अपना हाथ पीछे खींच लिया और वो कुछ नहीं बोली।
अब मेरा लंड खड़ा होने लगा था तो में आटे के साथ खेलता हुआ उसके और करीब जाने लगा और इतना करीब कि मेरा लंड उसकी मस्त गदराई भरी हुई गांड पर छू गया। फिर वो अब भी कुछ नहीं बोली तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई। फिर मैंने कहा कि भाभी तुम तो बड़ी सुंदर हो और अजय भैया तुम्हें बहुत खुश रखते होगे? तो भाभी बोली कि अच्छा में तुझे सुंदर लगती हूँ, कहाँ से? तो मैंने कहा कि कहाँ-कहाँ से कहूँ? तुम तो सभी जगह से सुंदर हो। फिर भाभी बोली कि मुझे तेरी नियत ठीक नहीं लगती, में तो घर जा रही हूँ। फिर मैंने कहा कि अरे आप तो नाराज़ हो रही हो, में तो मज़ाक कर रहा था। अब मेरा लंड अभी भी उसकी गांड को टच कर रहा था और रोड की तरह खड़ा हो रहा था। फिर वो चुपचाप रोटी बनाने लगी और में उसकी कभी गांड, कभी कमर, कभी बूब्स और कभी उसके गोरे-गोर गालों को देखता जा रहा था।
अब धीरे-धीरे मेरा लंड तना जा रहा था। फिर मैंने धीरे-धीरे अपने एक हाथ से उसके गालों को छुआ और कहा कि भाभी तुम्हारे गाल कितने सुंदर है? तो भाभी बोली कि अच्छा और उसने कुछ नहीं कहा। फिर मेरी हिम्मत और बढ़ गई। फिर मैंने उसकी कमर पर अपना एक हाथ रखकर कहा कि भाभी तुम्हारी कमर कितनी चिकनी और पतली है? तो उसके मुँह से सिसकारी सी निकल गई। अब में समझ गया था कि अब बात बन सकती है। फिर में धीरे से उसके पीछे आ गया और उसकी कमर को पकड़ते हुए अपने लंड को उसकी गांड के बीच की जगह पर रख दिया। फिर मेरे लंड को रखते ही मेरे और उसके मुँह से एक साथ लंबी सी सिसकारी की आवाज निकली और उसने रोटी बनाना छोड़कर आगे से मेरी गांड पकड़ ली, तो मैंने भी उसको कमर से टाईट पकड़ लिया और उसके गले पर किस करने लगा। अब वो एकदम मदहोश हुए जा रही थी और में भी। अब मेरे लंड का बुरा हाल था और अब किचन में हम दोनों की सिसकियाँ गूँज रही थी अम्म्म्मम, ऊफफफफफफ्फ।


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