अब मैं उसको छोड़ने के लिए मौके की तलाश में बता और एक दिन रब कि दुआ से
वो दिन ही गया, एक दिन ऐसा आ ही गया उस दिन रविवार था और मालिक की पूरी
फॅमिली शादी में गयी हुई थी. मेरा मन उसको छोड़ने के लिए बेक़रार था.
मन ही मन मेरा दिल भी मानता था की उसके अन्दर भी चुदवाने की आग लगी हुई है. तभी वो आई दरवाजा बंद कर ऊपर से कुण्डी लगा दी,अब वो काम करने लग गयी और इस्सी बीच मैंने डेली की तरह एक कप चाय बनाने को कहा और पीते हुए उसकी तरफ कर दी. और आज उसको छोड़ने की थान ही ली. मैंने उससे बातो बातो में उसके बच्चे के बारे में पुचा तो रूपा हस्ते हुए बोली- शराब की नशे में क्या बचे होंगे.में समाज गया की उसकी तरफ से ग्रीन सिग्नल मिल गया है. अब मै अपने रूम में सरे कपडे उतर कर बेड [आर लेट गया और आवाज लगायी, रूपा मेरे कमरे में जैसे ही आई मेरा लंड उससे देखते ही खड़ा हो गया और वो भी मुझे नंगा देख कर शर्मा गयी.
मैं- आओ मेरी जान. ये तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा है.
वो मेरे पास आई और लंड को अपने हाथो में पकड़ कर थूक लगा कर ऊपर निचे सहलाने लग गयी.
मैं- आज जब तक कोई नही आता मेरे लंड का मजा लो.
यह कहानी आप फ्री हिंदी सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे है|
मैंने धीरे धीरे उसके सरे कपडे उतर दिए और उसे पूरा नंगी कर दिया. अब वो मेरे सामने एक दुम पापड़ जैसे लग रही थी, उसके बूब्स तो मानो जैसे तुबेलिघ्त हो और उसकी चूत जैसे की गुलाब. अब वो मेरे ऊपर आ कर अपनी चूत को मेरे लंड पर सेट कर के बेथ गयी और मेरा लंड उसकी गरम चूत में अन्दर तक उतर गया और जोर जोर से ऊपर निचे होने लगा. रूपा भी गांड उठा उठा कर मेरे लंड को अन्दर बहार कर रही थी हमे बहुत मजा आ रहा था और वो खुद को बुरी तरह चुदवा रही थी. में बातो में उसे कहने लग गया की तू तो मस्त रंडी है रे पता नहीं तेरा पति तुझे क्यों नहीं चोदता.
रूपा- एक आप ही हो जो मुझे समाज सकते हो. आप जब भी जैसे भी मुझे बुलाओगे में आ जाया करुँगी.
में उसको चोदता रहा और वो मजे लेती रही तभी मेरे लंड ने इशारा कर दिया और में उसे जोर जोर से छोड़ने लगा वो समाज गयी और एक दम से उठ कर मेरा लंड आपने मुह में ले लिया और मेरा सारा माल उसके मुह में उतर गया और वो झट से पि गयी.
में थक चूका था पर उसकी चुदने की प्यास अभी भी बाकि थी. मैंने उसे पनी बहो में ले लिया और खा आज के लिए इतना ही बाकि कल करेंगे. अब में उठा और वॉलेट में से 500 रूपए निकल कर उसे दे दिए.
वो बहुत खुश हुई .
मन ही मन मेरा दिल भी मानता था की उसके अन्दर भी चुदवाने की आग लगी हुई है. तभी वो आई दरवाजा बंद कर ऊपर से कुण्डी लगा दी,अब वो काम करने लग गयी और इस्सी बीच मैंने डेली की तरह एक कप चाय बनाने को कहा और पीते हुए उसकी तरफ कर दी. और आज उसको छोड़ने की थान ही ली. मैंने उससे बातो बातो में उसके बच्चे के बारे में पुचा तो रूपा हस्ते हुए बोली- शराब की नशे में क्या बचे होंगे.में समाज गया की उसकी तरफ से ग्रीन सिग्नल मिल गया है. अब मै अपने रूम में सरे कपडे उतर कर बेड [आर लेट गया और आवाज लगायी, रूपा मेरे कमरे में जैसे ही आई मेरा लंड उससे देखते ही खड़ा हो गया और वो भी मुझे नंगा देख कर शर्मा गयी.
मैं- आओ मेरी जान. ये तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा है.
वो मेरे पास आई और लंड को अपने हाथो में पकड़ कर थूक लगा कर ऊपर निचे सहलाने लग गयी.
मैं- आज जब तक कोई नही आता मेरे लंड का मजा लो.
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मैंने धीरे धीरे उसके सरे कपडे उतर दिए और उसे पूरा नंगी कर दिया. अब वो मेरे सामने एक दुम पापड़ जैसे लग रही थी, उसके बूब्स तो मानो जैसे तुबेलिघ्त हो और उसकी चूत जैसे की गुलाब. अब वो मेरे ऊपर आ कर अपनी चूत को मेरे लंड पर सेट कर के बेथ गयी और मेरा लंड उसकी गरम चूत में अन्दर तक उतर गया और जोर जोर से ऊपर निचे होने लगा. रूपा भी गांड उठा उठा कर मेरे लंड को अन्दर बहार कर रही थी हमे बहुत मजा आ रहा था और वो खुद को बुरी तरह चुदवा रही थी. में बातो में उसे कहने लग गया की तू तो मस्त रंडी है रे पता नहीं तेरा पति तुझे क्यों नहीं चोदता.
रूपा- एक आप ही हो जो मुझे समाज सकते हो. आप जब भी जैसे भी मुझे बुलाओगे में आ जाया करुँगी.
में उसको चोदता रहा और वो मजे लेती रही तभी मेरे लंड ने इशारा कर दिया और में उसे जोर जोर से छोड़ने लगा वो समाज गयी और एक दम से उठ कर मेरा लंड आपने मुह में ले लिया और मेरा सारा माल उसके मुह में उतर गया और वो झट से पि गयी.
में थक चूका था पर उसकी चुदने की प्यास अभी भी बाकि थी. मैंने उसे पनी बहो में ले लिया और खा आज के लिए इतना ही बाकि कल करेंगे. अब में उठा और वॉलेट में से 500 रूपए निकल कर उसे दे दिए.
वो बहुत खुश हुई .

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